LAW'S VERDICT

30 बच्चों की मौत की PIL पर MP High Court सख्त: ‘अखबार पढ़कर याचिका नहीं, पहले मौके पर जाकर हकीकत देखो’

30 बच्चों की मौत के दावे पर हाईकोर्ट सख्त; अखबार की खबरों के आधार पर जनहित याचिका दाखिल करने पर याचिकाकर्ता को फटकार, 9 सितंबर को फिर सुनवाई

लॉज वर्डिक्ट न्यूज़ | जबलपुर

बालाघाट में 30 बच्चों की मौत के दावे को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को याचिकाकर्ता अधिवक्ता को कड़ी फटकार लगाई। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि सिर्फ समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर PIL दाखिल करना पर्याप्त नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील को निर्देश दिया कि वे पहले बालाघाट जाकर मौके की वास्तविक स्थिति यानी ग्राउंड रियलिटी देखें, तथ्यों की पड़ताल करें और रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश करें। इसके बाद ही PIL पर आगे सुनवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी।

‘पहले मौके पर जाओ, हकीकत पता करो’

गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने PIL दाखिल करने के आधार पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि नरसिंहपुर में रहने वाले याचिकाकर्ता ने बालाघाट में हुई घटना को लेकर मुख्य रूप से समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर याचिका दाखिल की है। डिवीजन बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को पहले मौके पर जाकर घटना और वहां की वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी जुटानी चाहिए थी। उन्हें मौके पर जाकर अपनी सेवाएं देना थीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले ग्राउंड रियलिटी सामने लाई जाए और उसके बाद ही मामले पर आगे न्यायिक विचार किया जाएगा।

30 बच्चों की मौत का किया गया है दावा

नरसिंहपुर के करेली निवासी अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने यह जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि बालाघाट जिले के बैहर और बिरसा क्षेत्रों में मलेरिया, खसरा और कुपोषण के कारण हाल में 30 बच्चों की मौत हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रभावित बच्चों को समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है।

50 बेड के अस्पताल में 400 बच्चों के इलाज का दावा

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि क्षेत्र में 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। याचिका में इन परिस्थितियों को गंभीर बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप करने और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई है। हालांकि, गुरुवार को हाईकोर्ट ने इन दावों पर सीधे आदेश देने के बजाय पहले मौके की वास्तविक स्थिति की जांच करने को प्राथमिकता दी।

हाईकोर्ट: अखबार की खबर और ग्राउंड रिपोर्ट में फर्क

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि किसी गंभीर घटना से संबंधित PIL दाखिल करते समय केवल मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह स्वयं बालाघाट जाकर बैहर और बिरसा क्षेत्र की स्थिति का जायजा लें, उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि करें और फिर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करें। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की सुनवाई होगी।

9 सितंबर को होगा बड़ा फैसला

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को निर्धारित की है। अब याचिकाकर्ता द्वारा पेश की जाने वाली ग्राउंड रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि 30 बच्चों की मौत, बीमारी, कुपोषण, अस्पताल की क्षमता और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर PIL में किए गए दावे वास्तविक स्थिति से कितने मेल खाते हैं। अगली सुनवाई में रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट मामले में आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देशों पर विचार करेगा।

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