शहडोल दुष्कर्म-हत्या मामले में मप्र हाईकोर्ट का फैसला; आरोपी को 25 साल तक नहीं मिलेगी माफी, पत्नी और दोस्त बरी
Laws Verdict News, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहडोल जिले में तीन साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी की फांसी की सजा को 25 साल की कठोर उम्रकैद में बदल दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को 25 वर्ष की अवधि पूरी होने तक किसी भी प्रकार की माफी या सजा में छूट का लाभ नहीं मिलेगा।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने शहडोल के जिला एवं सत्र न्यायालय, बुढ़ार द्वारा भेजे गए डेथ रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। साथ ही, मामले में आरोपी की पत्नी पिंकी और दोस्त राजकुमार को दी गई चार-चार वर्ष की सजा को निरस्त करते हुए दोनों को बरी कर दिया।
निचली अदालत ने सुनाई थी फांसी की सजा
मामला शहडोल जिले के खैरहा थाना क्षेत्र के ग्राम छिरहटी का है। यहां रहने वाले रामनारायण ढीमर को जिला एवं सत्र न्यायालय, बुढ़ार ने 13 जनवरी 2026 को फांसी की सजा सुनाई थी। अभियोजन के अनुसार, 1 मार्च 2023 की रात रामनारायण ने पड़ोस में रहने वाली तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। मामले में रामनारायण की पत्नी पिंकी और उसके दोस्त राजकुमार पर भी अपराध में सहयोग करने का आरोप लगाया गया था। निचली अदालत ने दोनों को चार-चार वर्ष की सजा सुनाई थी। फांसी की सजा की पुष्टि के लिए जिला अदालत ने मामला हाईकोर्ट को रेफर किया था।
'आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं'
हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में आरोपी की व्यक्तिगत और सामाजिक पृष्ठभूमि पर भी विचार किया। डिवीजन बेंच ने पाया कि आरोपी का पूर्व में कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। बेंच ने यह भी माना कि आरोपी ने दूसरी जाति में विवाह किया था और इसके कारण वह समाज में पहले से ही उपेक्षित महसूस कर रहा था। अदालत के अनुसार, उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को समाज के लिए ऐसा खतरा नहीं माना जा सकता, जिसके कारण उसे मृत्युदंड दिया जाना आवश्यक हो।
32 वर्ष की उम्र में सुधार की संभावना
हाईकोर्ट ने आरोपी की उम्र और उसके सुधार एवं पुनर्वास की संभावना को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि आरोपी की उम्र लगभग 32 वर्ष है और उसमें सुधार तथा पुनर्वास की संभावना मौजूद है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए डिवीजन बेंच ने माना कि यह मामला मृत्युदंड देने के लिए आवश्यक 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' श्रेणी में नहीं आता। इसलिए निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा को बदलकर 25 वर्ष की उम्रकैद करना न्यायोचित होगा।
पत्नी और दोस्त को भी मिली राहत
हाईकोर्ट ने रामनारायण की पत्नी पिंकी और दोस्त राजकुमार के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण किया। अदालत ने दोनों को दी गई चार-चार वर्ष की सजा को निरस्त कर दिया और उन्हें मामले में बरी करने का आदेश दिया। इस प्रकार हाईकोर्ट ने डेथ रेफरेंस का निराकरण करते हुए मुख्य आरोपी की फांसी को 25 वर्ष की उम्रकैद में बदल दिया, जबकि उसकी पत्नी और दोस्त को दोषमुक्त कर दिया।
