डेढ़ साल से अधिक की न्यायिक हिरासत, ट्रायल में देरी और 7 साल की अधिकतम सजा को आधार बनाते हुए मिली राहत
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार पूर्व परिवहन विभाग के आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा को नियमित जमानत दे दी है। यह उनकी तीसरी जमानत अर्जी थी, जिसे जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की अदालत ने स्वीकार कर लिया। इससे पहले उनकी नियमित जमानत की अर्जी मेरिट पर खारिज हो चुकी थी, जबकि एक अंतरिम जमानत अर्जी भी निरस्त हो गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, प्रवर्तन निदेशालय (ED) अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल कर चुका है, आरोप तय हो चुके हैं और ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। ऐसे में लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।
ED ने दर्ज किया था मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
प्रकरण में ईडी ने ECIR/BHZO/19/2024 दर्ज कर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 3 एवं 4 के तहत कार्रवाई की थी। ईडी की जांच लोकायुक्त द्वारा दर्ज उस एफआईआर पर आधारित है, जिसमें सौरभ शर्मा पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, सौरभ शर्मा ने परिवहन विभाग में पदस्थ रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग कर कथित रूप से अपराध की आय अर्जित की और उसे परिवार के सदस्यों, सहयोगियों, कंपनियों एवं अन्य संस्थाओं के माध्यम से विभिन्न चल-अचल संपत्तियों तथा व्यावसायिक उपक्रमों में निवेश किया।
छापों में नकदी और सोना मिलने का आरोप
ईडी के अनुसार, 19 दिसंबर 2024 को की गई तलाशी के दौरान सौरभ शर्मा से जुड़े विभिन्न परिसरों से नकदी, सोने के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किए गए। इसी दिन आयकर विभाग ने सह-आरोपी चेतन सिंह गौर के नाम से पंजीकृत एक वाहन से नकदी और सोने की ईंटें (Gold Bullion) भी जब्त की थीं। एजेंसी का दावा है कि उक्त वाहन का उपयोग सौरभ शर्मा कर रहे थे।
पहले भी खारिज हो चुकी थीं जमानत अर्जियां
ईडी ने 10 फरवरी 2025 को सौरभ शर्मा को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था। इससे पहले वे मूल (Predicate) अपराध में न्यायिक हिरासत में थे। मूल मामले में समय-सीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें 1 अप्रैल 2025 को डिफॉल्ट बेल मिल गई थी।
इसके बाद ईडी ने 8 अप्रैल 2025 को विशेष अदालत (PMLA) में अभियोजन शिकायत दाखिल की। विशेष न्यायालय ने 24 अप्रैल 2025 को नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने भी उनकी पहली नियमित जमानत याचिका निरस्त कर दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) वापस ले ली गई थी। पत्नी की गंभीर बीमारी के आधार पर दायर अंतरिम जमानत अर्जी भी जून 2026 में खारिज हो गई थी।
हाईकोर्ट ने इन आधारों पर दी जमानत
हाईकोर्ट ने कहा कि—
- जांच पूरी हो चुकी है।
- अभियोजन शिकायत दाखिल हो चुकी है।
- आरोप तय किए जा चुके हैं।
- आरोपी 10 फरवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में है।
- आरोपित अपराध में अधिकतम सजा 7 वर्ष है।
- ट्रायल निकट भविष्य में पूरा होने की संभावना नहीं है।
अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विचाराधीन (Undertrial) आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं है और लंबी न्यायिक हिरासत जमानत पर विचार करने का महत्वपूर्ण आधार है।
10 लाख के निजी मुचलके पर मिली राहत
हाईकोर्ट ने सौरभ शर्मा को 10 लाख रुपये के निजी मुचलके तथा समान राशि के एक स्थानीय सक्षम जमानतदार पर रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही निम्न शर्तें लगाई गईं—
- किसी भी गवाह को प्रभावित या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
- न्यायालय की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेंगे।
- भविष्य में कोई अपराध नहीं करेंगे।
- प्रत्येक सुनवाई पर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहेंगे और अनावश्यक स्थगन नहीं मांगेंगे।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 480(3) का पालन करेंगे।
