LAW'S VERDICT

मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत पर नामांकन में गलत जानकारी देने के आरोप वाली जनहित याचिका पर फैसला सुरक्षित

मप्र हाईकोर्ट पहले ही ख़ारिज कर चुका है एक याचिका 

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सागर जिले की रहली विधानसभा सीट से विधायक व प्रदेश सरकार के मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने नामांकन पत्र में कथित रूप से गलत जानकारी दी और करोड़ों रुपये की संपत्तियों का विवरण छिपाया।

मंगलवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया एवं जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।

याचिका में क्या लगाए गए हैं आरोप?

सागर जिले की रहली विधानसभा क्षेत्र के निवासी राजकुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधायक गोविन्द सिंह राजपूत तथा उनकी पत्नी सविता गोविन्द राजपूत ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दाखिल नामांकन पत्र और शपथपत्र में कथित रूप से करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया।

याचिका के अनुसार, इन संपत्तियों में उनके व्यक्तिगत नाम के अलावा ज्ञानवीर सेवा समिति के नाम दर्ज संपत्तियां भी शामिल हैं, जिनकी जानकारी चुनाव आयोग को नहीं दी गई।

चुनाव आयोग में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का दावा

याचिकाकर्ता का कहना है कि इस संबंध में 21 मार्च 2025 को चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की गई थी, लेकिन अब तक कोई तर्कसंगत आदेश पारित नहीं किया गया। राज्य सरकार को भी शिकायत दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।

पहले भी खारिज हो चुकी है एक याचिका

सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि इसी विषय से संबंधित एक अन्य याचिका, जिसे सागर जिले के राहतगढ़ निवासी नीरज शर्मा ने दायर किया था, उसे हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।

सभी पक्षों ने रखीं दलीलें

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी, चुनाव आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ शर्मा, हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल एवं अधिवक्ता अर्पित अग्रवाल, जबकि विधायक गोविन्द सिंह राजपूत की ओर से अधिवक्ता विवेक रंजन पाण्डेय ने अपने-अपने पक्ष रखे।

सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

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