LAW'S VERDICT

स्पेशल और सामान्य शिक्षक का फर्क तक नहीं समझ सके अफसर, हाईकोर्ट ने जमकर की खिंचाई

RCI मान्यता के बावजूद नौकरी रोकने पर MP हाईकोर्ट ने कहा- यह मनमानी और संविधान के खिलाफ, स्पेशल एजुकेशन टीचर को नियुक्ति देने के आदेश

इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पेशल एजुकेशन टीचर की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार की कार्रवाई को मनमाना और कानून के विपरीत बताते हुए निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विशेष शिक्षा (Special Education) के शिक्षकों की योग्यता का मूल्यांकन रीहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (RCI) के मानकों पर होगा, न कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की सूची के आधार पर।

जस्टिस जेके पिल्लई की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को याचिकाकर्ता दालचंद अहीर के नियुक्ति प्रकरण पर विधि के अनुसार कार्रवाई कर सभी परिणामी लाभ एवं वरिष्ठता देने के निर्देश दिए।

2011 में परीक्षा पास, फिर भी नहीं मिली नियुक्ति

याचिकाकर्ता दालचंद अहीर ने वर्ष 2011 में भोपाल के दिग्दर्शिका इंस्टीट्यूट ऑफ रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च से डी.एड. (मेंटल रिटार्डेशन) किया था। यह संस्थान RCI से मान्यता प्राप्त है। इसके बाद उसने संविदा शाला शिक्षक ग्रेड-3 पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की और 150 में से 83.72 अंक प्राप्त किए। दस्तावेज सत्यापन और चॉइस फिलिंग के बाद उसकी पदस्थापना जनपद पंचायत कुक्षी, जिला धार में हुई।

NCTE सूची में नाम नहीं होने का हवाला देकर रोकी नियुक्ति

जब याचिकाकर्ता जॉइनिंग के लिए पहुंचा तो अधिकारियों ने यह कहते हुए नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया कि उसके संस्थान का नाम NCTE की मान्यता प्राप्त सूची में नहीं है। इसी आधार पर उसकी नियुक्ति रोक दी गई।

हाईकोर्ट बोला- स्पेशल एजुकेशन में RCI ही सक्षम प्राधिकरण

हाईकोर्ट ने कहा कि स्पेशल एजुकेशन टीचर की योग्यता और प्रशिक्षण को नियंत्रित करने वाली वैधानिक संस्था RCI है, जबकि सामान्य शिक्षकों के प्रशिक्षण का दायित्व NCTE का है।

अदालत ने NCTE और RCI के बीच हुए एमओयू (MoU) का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। इसलिए स्पेशल एजुकेशन की डिग्री को NCTE की सूची पर परखना पूरी तरह गलत और कानून के विपरीत है।

अधिकारियों ने बिना सोच-विचार के लिया फैसला

कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों ने बिना दिमाग लगाए सामान्य नियमों को विशेष शिक्षा के मामले में लागू कर दिया। यह यांत्रिक (Mechanical) और मनमाना (Arbitrary) प्रशासनिक निर्णय है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।

समान योग्यता वाले दूसरे अभ्यर्थी को मिल चुकी थी नौकरी

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि समान योग्यता रखने वाले एक अन्य अभ्यर्थी अर्जुन अहीर को नियुक्ति दी जा चुकी है। हाईकोर्ट ने माना कि समान परिस्थितियों वाले दो अभ्यर्थियों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना अनुच्छेद 16 के तहत समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने नियुक्ति रोकने का फैसला किया रद्द

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की, मेरिट हासिल की और उसके पास RCI मान्यता प्राप्त वैध योग्यता थी। इसके बावजूद उसकी नियुक्ति रोकना पूरी तरह अवैध था।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का नियुक्ति रोकने का आदेश रद्द (Quash) करते हुए याचिका स्वीकार कर ली और याचिकाकर्ता को नियमों के अनुसार नियुक्ति तथा सभी परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     W.P. No. 9500/2013

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