जिला अधिवक्ता संघ के पत्र से हाईकोर्ट पहुंचा मामला; क्षेत्राधिकार स्पष्ट नहीं होने से पक्षकार और वकील परेशान, 4 अगस्त को होगी अहम सुनवाई
जबलपुर | लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज
छिंदवाड़ा के ग्रामीण और तहसील क्षेत्रों से जुड़े पारिवारिक मामलों की सुनवाई आखिर किस अदालत में होगी? क्षेत्राधिकार को लेकर पैदा हुई इसी असमंजस की स्थिति पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। जिला अधिवक्ता संघ, छिंदवाड़ा की ओर से भेजे गए पत्र में फैमिली कोर्ट के क्षेत्राधिकार को स्पष्ट करने की मांग की गई है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मामले को सुनवाई के लिए लेते हुए 4 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है।
ग्रामीण क्षेत्रों के मामले सुनने से इनकार का दावा
जिला अधिवक्ता संघ, छिंदवाड़ा ने 3 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट को पत्र भेजकर क्षेत्राधिकार से जुड़ी समस्या की जानकारी दी थी।
पत्र में बताया गया कि छिंदवाड़ा कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने छिंदवाड़ा ग्रामीण एवं तहसील मुख्यालय से संबंधित पारिवारिक मामलों की सुनवाई और निराकरण का क्षेत्राधिकार नहीं होने की बात कही है।
अधिवक्ता संघ के मुताबिक क्षेत्राधिकार के अभाव में कई लंबित प्रकरणों का निराकरण कर दिया गया, जबकि नए प्रकरणों को भी सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया जा रहा है।
इससे सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि छिंदवाड़ा ग्रामीण क्षेत्र के पारिवारिक विवादों की सुनवाई आखिर किस न्यायालय में होगी?
17 जून के ज्ञापन के बाद बढ़ा असमंजस
अधिवक्ता संघ के पत्र के अनुसार कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने 17 जून 2026 को ज्ञापन के माध्यम से संघ को बताया था कि छिंदवाड़ा की ग्रामीण तहसील के अंतर्गत आने वाले मामलों पर कुटुंब न्यायालय की अधिकारिता नहीं है।
इसके बाद से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले वैवाहिक एवं अन्य पारिवारिक मामलों को लेकर अधिवक्ताओं और पक्षकारों के सामने व्यावहारिक समस्या खड़ी हो गई।
कार्य विभाजन में भी स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने का दावा
जिला अधिवक्ता संघ का कहना है कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा 22 अप्रैल 2025 को जारी कार्य विभाजन ज्ञापन में भी छिंदवाड़ा ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े कुटुंब न्यायालय के मामलों के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई थी।
क्षेत्राधिकार को लेकर स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आने के बाद अधिवक्ता संघ ने सीधे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।
संघ ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि इस मुद्दे पर जल्द प्रशासनिक निर्णय लेकर यह स्पष्ट किया जाए कि ग्रामीण एवं तहसील क्षेत्र से संबंधित पारिवारिक मामलों की सुनवाई किस न्यायालय द्वारा की जाएगी।
पक्षकारों और वकीलों की बढ़ीं मुश्किलें
क्षेत्राधिकार को लेकर पैदा हुई इस स्थिति का सीधा असर आम पक्षकारों और अधिवक्ताओं पर पड़ रहा है।
पारिवारिक मामलों की सुनवाई नहीं होने से वैवाहिक एवं अन्य पारिवारिक विवादों के निराकरण में देरी हो रही है। जिला मुख्यालय पर प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं के लिए भी यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित नए प्रकरण किस न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएं।
अब 4 अगस्त को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। इसमें छिंदवाड़ा ग्रामीण क्षेत्र के पारिवारिक मामलों के क्षेत्राधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
