हाईकोर्ट ने कहा- आसानी से पास कर सकते थे परीक्षा
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 वर्ष तक नौकरी करने के बावजूद अनिवार्य सीपीसीटी (CPCT) परीक्षा पास नहीं करने वाले एक कंप्यूटर इंजीनियर की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए उसकी रिट अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब कर्मचारी कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बी.ई. डिग्रीधारी है, तब उसके लिए सीपीसीटी जैसी परीक्षा पास करना कठिन नहीं होना चाहिए था।
जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सीधी जिले के ग्राम जमोदी कला निवासी अमित सिंह बघेल की ओर से दायर रिट अपील पर सुनाया।
2016 में मिली थी अनुकंपा नियुक्ति
याचिकाकर्ता को 21 जुलाई 2016 को असिस्टेंट ग्रेड-3 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। नियुक्ति आदेश में स्पष्ट शर्त थी कि उसे तीन वर्ष के भीतर सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। निर्धारित समयसीमा और अतिरिक्त अवसर मिलने के बावजूद वह परीक्षा पास नहीं कर सका। इसके बाद 26 मई 2025 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका 16 जून 2025 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ डिवीजन बेंच में यह अपील दायर की गई।
कंप्यूटर इंजीनियर होने की दलील नहीं आई काम
अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि उसने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बी.ई. की डिग्री प्राप्त की है, जो सामान्य कंप्यूटर डिप्लोमा से कहीं अधिक उच्च योग्यता है। इसलिए उसकी कंप्यूटर दक्षता पर संदेह नहीं किया जा सकता।
डिवीजन बेंच ने यह तर्क स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि अपीलकर्ता कंप्यूटर इंजीनियर है, तो उसके लिए सीपीसीटी परीक्षा आसानी से पास करना संभव था। इसके बावजूद लगभग 9 वर्षों की सेवा और पर्याप्त अवसर मिलने के बाद भी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करना नियुक्ति की शर्तों का उल्लंघन है।
9 साल की नौकरी और 4 साल का अतिरिक्त मौका भी मिला
अदालत ने कहा कि कर्मचारी को केवल निर्धारित तीन वर्ष ही नहीं, बल्कि उसके बाद भी पर्याप्त समय और अवसर मिले। इसके बावजूद वह अनिवार्य योग्यता हासिल नहीं कर सका। ऐसे में विभाग द्वारा सेवा समाप्त करने का निर्णय पूरी तरह उचित है और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
विभाग को दिया मानवीय सुझाव
हालांकि हाईकोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि यदि संबंधित विभाग उचित समझे तो मामले की परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में अपीलकर्ता को चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) के पद पर नियुक्ति देने पर विचार किया जा सकता है।
हाईकोर्ट का संदेश
फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में नियुक्ति की शर्तों का पालन अनिवार्य है। पर्याप्त अवसर मिलने के बाद भी आवश्यक परीक्षा पास नहीं करने पर कर्मचारी केवल सहानुभूति के आधार पर राहत का दावा नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WA-2195-2025
