सामान्य वर्ग ने की सरकार के प्रमोशन आदेशों पर रोक की मांग; अब 13 जुलाई को होगी सुनवाई
जबलपुर। मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण (Promotion Reservation) से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई अब 13 जुलाई को होगी। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता के उपलब्ध नहीं होने के कारण एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने अगली तारीख निर्धारित कर दी। महाधिवक्ता मंगलवार को इंदौर में हाईकोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष व्यस्त थे। अगली सुनवाई में वे राज्य सरकार का पक्ष रखेंगे। हालांकि बेंच ने यह भी कहा कि यह काफी महत्वपूर्ण मामला है, जिसके जल्द निराकरण का प्रयास किया जाएगा।
2025 के प्रमोशन नियमों को दी गई है चुनौती
भोपाल की डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने प्रमोशन रूल्स-2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों में पूर्व चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली बेंच ने 17 फरवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन उनके सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के कारण निर्णय नहीं आ सका।
महाधिवक्ता रखेंगे सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने अदालत को बताया कि इस महत्वपूर्ण मामले में स्वयं महाधिवक्ता सरकार की ओर से पैरवी करेंगे। चूंकि वे इंदौर में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष व्यस्त हैं, इसलिए सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया गया, जिसे बेंच ने स्वीकार कर लिया।
'जेंटलमेन प्रॉमिस' के बावजूद जारी हुए प्रमोशन आदेश!
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने अदालत में कहा कि पूर्व सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया था कि मामले के लंबित रहने तक सरकार कोई प्रमोशन नहीं करेगी। इसके बावजूद विभिन्न विभागों में विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें कराकर कई प्रमोशन आदेश जारी कर दिए गए।
'जरूरत पड़ी तो वीडियो भी दिखा दूंगा'
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता की कथित अंडरटेकिंग को लेकर बहस तेज हो गई। वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कहा कि उनके पास पूर्व सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग का वीडियो मौजूद है, जिसमें महाधिवक्ता का आश्वासन रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि यदि अदालत चाहे तो वह वीडियो भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रमोशन पर रोक की मांग, कोर्ट देगी आदेश
वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा और अधिवक्ता सुयश मोहन गुरु ने दलील दी कि जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, तब सरकार द्वारा लगातार प्रमोशन आदेश जारी करना उचित नहीं है। उन्होंने इन आदेशों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। इस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि वह इस मुद्दे पर उचित आदेश पारित करेगी।
