LAW'S VERDICT

स्विमिंग पूल में मौत के बाद पूरा निसर्ग रिजॉर्ट सील करना गलत! हाईकोर्ट ने तुरंत खोलने के दिए आदेश

कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी, घटना के आधार पर पूरे रिजॉर्ट को सील नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बरेला थानांतर्गत निसर्ग रिसोर्ट के स्विमिंग पूल में एक युवक की हुई मौत के बाद पूरे रिजॉर्ट को सील किए जाने की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी करते हुए प्रशासन को तत्काल रिजॉर्ट का सील हटाने (De-seal) का आदेश दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल एक घटना के आधार पर पूरे रिजॉर्ट को बंद करना न्यायोचित नहीं है।

स्विमिंग पूल के पास करंट लगने से हुई थी मौत

याचिका के अनुसार 24 मई 2026 को रिजॉर्ट परिसर में एक दुखद हादसा हुआ था। स्विमिंग पूल के पास लगे स्टील पोल से गुजर रहे खुले बिजली के तारों की चपेट में आने से एक व्यक्ति की करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना के बाद 27 मई 2026 को रिजॉर्ट संचालक कंपनी के डायरेक्टर विवेक त्रिपाठी तथा कंपनी के दो प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि हादसे के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, इसलिए प्रशासन ने पूरे रिजॉर्ट को सील कर दिया।

हाईकोर्ट ने पूछा- पूरा रिजॉर्ट सील करने की वजह क्या थी?

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासन यह बताने में विफल रहा कि पूरे रिजॉर्ट को सील करना क्यों आवश्यक था। आदेश में ऐसा कोई ठोस कारण दर्ज नहीं है जिससे यह साबित हो कि पूरे परिसर को बंद करना जरूरी था।

अदालत ने पाया कि प्रशासन के आदेश में यह कहीं नहीं बताया गया कि पूरे रिजॉर्ट को सील करना क्यों आवश्यक था। कोर्ट ने कहा कि यदि स्विमिंग पूल में मौत हुई है, तो उसकी जांच और आवश्यक कार्रवाई अलग विषय है, लेकिन इसके आधार पर पूरे परिसर को बंद करना उचित नहीं ठहराया जा सकता।

'कानून-व्यवस्था संभालना प्रशासन का काम'

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि रिजॉर्ट संचालक की। यदि किसी घटना से कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है, तो उसे नियंत्रित करना प्रशासन का दायित्व है। केवल इस आधार पर पूरे रिजॉर्ट को सील नहीं किया जा सकता।

तत्काल डी-सील करने का आदेश

अदालत ने प्रशासन को तत्काल प्रभाव से रिजॉर्ट का सील हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     WP-23177-2026

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