पेपर लीक, फर्जी परीक्षार्थी और भर्ती घोटालों पर बड़ा फैसला; भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में विशेष अदालतें स्थापित
जबलपुर। मध्यप्रदेश में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़े और अन्य अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। उच्च न्यायालय ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत दर्ज मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रदेश में चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए हैं। यह पहल एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया के निर्देश पर की गई है।
चार्जशीट के 3 महीने के भीतर फैसला सुनाने का लक्ष्य
हाईकोर्ट ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिए हैं कि इन विशेष अदालतों में जैसे ही चार्जशीट प्रस्तुत हो, उसके बाद तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा कर निर्णय सुनाने का हरसंभव प्रयास किया जाए। उद्देश्य यह है कि भर्ती परीक्षाओं में धांधली से जुड़े मामलों का वर्षों तक लंबित रहने के बजाय समयबद्ध निपटारा हो सके।
किन मामलों की होगी सुनवाई
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े गंभीर अपराधों की सुनवाई की जाएगी। इनमें प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग, फर्जी परीक्षार्थी बैठाना तथा राज्य या केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों जैसे सीबीआई, एसआईटी आदि द्वारा जांचे गए परीक्षा अपराध शामिल हैं।
चार संभागों में विशेष अदालतें गठित
रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह के नाम से जारी आदेश में मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश के चार प्रमुख संभागों में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीशों को इन विशेष अदालतों की जिम्मेदारी सौंपी है—
- भोपाल: प्रवीण पटेल, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
- इंदौर: डॉ. शुभ्रा सिंह, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
- ग्वालियर: विशाल अखण्ड, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
- जबलपुर: आनंद कुमार सेहलाम, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन से भर्ती परीक्षाओं में धांधली से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है। समयबद्ध फैसलों से न केवल दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित होगी, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के विश्वास को भी मजबूती मिलेगी।
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