LAW'S VERDICT

15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात पर हाईकोर्ट ने दिए स्पेशल मेडिकल बोर्ड गठित करने के आदेश

मंडला POCSO कोर्ट के रेफरेंस पर अब 15 जून को मेडिकल रिपोर्ट के साथ होगी अगली सुनवाई

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंडला जिले की 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात से जुड़े संवेदनशील मामले में विशेष मेडिकल जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस विनय सराफ की वेकेशन बेंच ने पीड़िता की कम उम्र और गर्भपात के दौरान संभावित स्वास्थ्य जोखिम को देखते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक को पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों का विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से पीड़िता की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है।

10 सप्ताह से अधिक की गर्भवती है पीड़िता

मामला मंडला की विशेष POCSO कोर्ट द्वारा रेफरेंस के रूप में हाईकोर्ट भेजा गया है। रिकॉर्ड के अनुसार 15 वर्षीय पीड़िता करीब 10 सप्ताह और 5 दिन की गर्भवती है।

जिला अस्पताल मंडला के मेडिकल बोर्ड ने गर्भपात की अनुशंसा तो की, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि पीड़िता की कम उम्र और शारीरिक स्थिति को देखते हुए गर्भपात की प्रक्रिया उसके जीवन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। इसी कारण ट्रायल कोर्ट ने अंतिम निर्णय के लिए मामला हाईकोर्ट के समक्ष भेजा।

हाईकोर्ट ने मांगी विशेषज्ञों की राय

शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता गिरीश केकरे उपस्थित हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय लेना आवश्यक माना।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि मेडिकल बोर्ड पीड़िता की शारीरिक एवं मानसिक स्थिति का परीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे, ताकि गर्भपात के संबंध में उचित निर्णय लिया जा सके।

मेडिकल बोर्ड से इन तीन अहम सवालों पर मांगी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने विशेष मेडिकल बोर्ड से निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्ट राय देने को कहा है—

1. गर्भावस्था जारी रहने का जोखिम

क्या गर्भावस्था को जारी रखने से पीड़िता के जीवन, शारीरिक स्वास्थ्य या मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है?

2. गर्भपात से जीवन को खतरा

क्या गर्भसमापन (Medical Termination of Pregnancy) की प्रक्रिया से पीड़िता के जीवन को कोई गंभीर या असामान्य जोखिम उत्पन्न होगा?

3. भ्रूण की स्वास्थ्य स्थिति

यदि गर्भावस्था जारी रहती है और बच्चे का जन्म होता है, तो क्या उसमें किसी गंभीर शारीरिक या मानसिक विकृति अथवा असामान्यता की संभावना है?

15 जून को होगी महत्वपूर्ण सुनवाई

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मिलने के बाद हाईकोर्ट यह तय करेगा कि पीड़िता का गर्भपात कराया जाए या नहीं। मामले में 15 जून की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उसी आधार पर आगे की कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया तय होगी।


हाईकोर्ट का आदेश देखें      WP-20159-2026

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