LAW'S VERDICT

कांग्रेस या भाजपा? विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर हाईकोर्ट में बहस पूरी, फैसला सुरक्षित

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बीना से विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता और कथित दल-बदल से जुड़े मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित कर लिया।

मामला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें दावा किया गया है कि निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उनकी सदस्यता समाप्त करने संबंधी आवेदन पर लंबे समय से कोई निर्णय नहीं लिया गया।

क्या है पूरा मामला?

याचिका में कहा गया है कि निर्मला सप्रे वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बीना सीट से निर्वाचित हुई थीं। बाद में उनके भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होने और समर्थन देने के आरोप लगे। इसके बाद जून 2024 में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि आवेदन दिए जाने के बाद भी निर्धारित समय में कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

कोर्ट में क्या हुई बहस?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने दल-बदल से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए 90 दिन की समय-सीमा निर्धारित की है। इसके बावजूद मामला लंबे समय से लंबित रखा गया है।

उन्होंने अदालत से कहा, "दो साल से मामला स्पीकर के पास लंबित है। यदि न्यायिक हस्तक्षेप नहीं हुआ तो अगले दो साल भी निर्णय आने की उम्मीद नहीं है।"

एजी बोले- एक विधायक से सरकार पर कोई असर नहीं

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है और उसके पास पर्याप्त बहुमत है।

उन्होंने अदालत में कहा, "सरकार के पास 163 विधायक हैं। एक विधायक यहां-वहां हो जाए तो भी सरकार की स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। विधानसभा अध्यक्ष मामले पर संज्ञान ले चुके हैं और विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए सुनवाई में समय लग रहा है।"

सुनवाई में उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा भी उपस्थित रहे।

निर्मला सप्रे का दावा- मैं आज भी कांग्रेस में हूं

विधायक निर्मला सप्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी मुवक्किल ने कभी भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की है।

अदालत को बताया गया कि सप्रे अभी भी कांग्रेस की सदस्य हैं, उन्होंने पार्टी व्हिप का पालन किया है और न तो उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है और न ही उनकी सदस्यता समाप्त की गई है। इसलिए दल-बदल का आरोप तथ्यहीन है और याचिका खारिज की जानी चाहिए।

अब हाईकोर्ट के फैसले पर नजर

मामले में सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब नजर इस बात पर है कि हाईकोर्ट विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका, सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय-सीमा और दल-बदल कानून की व्याख्या को लेकर क्या निर्णय देता है।

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