LAW'S VERDICT

महाराष्ट्र के स्लॉटर हाउस ले जाए जा रहे 48 गौवंशों की सुपुर्दगी पर हाईकोर्ट की रोक

बालाघाट की निचली अदालत को 30 दिन में फैसला करने के निर्देश

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बालाघाट पुलिस द्वारा जब्त किए गए 48 गौवंशों की सुपुर्दगी (कस्टडी) पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए अधीनस्थ न्यायालय को संबंधित पुनरीक्षण याचिका का 30 दिनों के भीतर निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी की वेकेशन बेंच ने की।

6 पिकअप वाहनों में भरे मिले थे 48 गौवंश

मामले के अनुसार, 10 मई 2026 की रात बालाघाट जिले के लालबर्रा थाना पुलिस ने अमाटोला रोड स्थित अंबेडकर चौक पर कार्रवाई करते हुए छह पिकअप वाहनों को रोका था। आरोप है कि इन वाहनों में 48 गौवंशों को कथित रूप से क्रूरता पूर्वक भरकर महाराष्ट्र के स्लॉटर हाउस ले जाया जा रहा था।

पुलिस ने सभी गौवंशों को जब्त कर संबंधित कार्रवाई शुरू की थी।

मजिस्ट्रेट ने दिए थे सुपुर्दगी के आदेश

इस मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 22 मई 2026 को गौवंशों को सुपुर्दगी पर सौंपने के आदेश पारित किए गए थे। इन आदेशों को चुनौती देते हुए गौवंश रक्षण समिति, वारासिवनी के प्रशासक अभिषेक सुराना ने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

हालांकि 26 मई 2026 को पुनरीक्षण याचिका खारिज हो गई, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

फर्जी दस्तावेजों का आरोप

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर और अजय माहेश्वरी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि जिन रसीदों और दस्तावेजों के आधार पर गौवंशों की सुपुर्दगी का दावा किया गया, वे संदिग्ध और फर्जी हैं।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि संबंधित व्यक्तियों को गौवंशों की कस्टडी प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार नहीं है, इसलिए सुपुर्दगी आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए।

हाईकोर्ट का आदेश

दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में तत्काल राहत देते हुए—

  • गौवंशों की सुपुर्दगी संबंधी आदेश पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने के निर्देश दिए।
  • संबंधित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को पुनरीक्षण याचिका का 30 दिनों के भीतर निपटारा करने का आदेश दिया।
  • अंतिम निर्णय होने तक गौवंशों की कस्टडी में कोई परिवर्तन नहीं करने को कहा।

सुपुर्दगी के दस्तावेजों का होगा परीक्षण 

यह मामला गौवंश परिवहन, पशु क्रूरता और सुपुर्दगी आदेशों की वैधता से जुड़ा हुआ है। अब अधीनस्थ अदालत को यह तय करना होगा कि जिन दस्तावेजों के आधार पर सुपुर्दगी मांगी गई थी, वे वैध हैं या नहीं तथा संबंधित पक्ष वास्तव में गौवंशों पर दावा करने के अधिकारी हैं या नहीं।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     MCRC-25276-2026

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