सरकार के सर्कुलर को बताया असंवैधानिक, सिंगल बेंच का आदेश पलटा
क्या था पूरा मामला
विदिशा के एस.एस.एल. जैन पीजी कॉलेज में प्रिंसिपल के प्रभार को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठता के आधार पर डॉ. अर्चना जैन को प्रभार देने की सिफारिश हुई। वहीं, कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने डॉ. एस.के. उपाध्याय को प्रिंसिपल बनाने का निर्णय लिया। इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला कोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि माइनॉरिटी संस्थान को यह पूरा अधिकार है कि वह अपनी पसंद का प्रिंसिपल नियुक्त करे। ऐसे मामलों में सीनियरिटी को थोपना संविधान के खिलाफ है।
सरकारी सर्कुलर पर सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने 25 अगस्त 2021 और 08 सितम्बर 2021 के सर्कुलर को लेकर कहा कि ये सर्कुलर माइनॉरिटी संस्थानों पर लागू नहीं हो सकते। यह Article 30(1) of the Constitution of India का उल्लंघन है। यानी, सरकार यह तय नहीं कर सकती कि प्रिंसिपल कौन बनेगा।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
- माइनॉरिटी संस्थान का अधिकार पूर्ण (absolute) है।
- कोर्ट भी यह नहीं देखेगा कि चयन सही है या गलत।
- जब तक व्यक्ति योग्य है, चयन में हस्तक्षेप नहीं होगा।
