LAW'S VERDICT

माइनॉरिटी कॉलेज के अधिकार पर हाईकोर्ट की मुहर, कहा—संस्थान तय करेगा कौन बनेगा प्रिंसिपल

सरकार के सर्कुलर को बताया असंवैधानिक, सिंगल बेंच का आदेश पलटा

ग्वालियर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने माइनॉरिटी शिक्षण संस्थानों के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि ऐसे संस्थान अपने प्रिंसिपल का चयन अपनी पसंद से कर सकते हैं, भले ही वह सीनियर-मोस्ट शिक्षक न हो। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की डिवीज़न बेंच ने इस मामले में सिंगल बेंच के आदेश को पलटते हुए अपील मंजूर कर ली।

क्या था पूरा मामला

विदिशा के एस.एस.एल. जैन पीजी कॉलेज में प्रिंसिपल के प्रभार को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठता के आधार पर डॉ. अर्चना जैन को प्रभार देने की सिफारिश हुई। वहीं, कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने डॉ. एस.के. उपाध्याय को प्रिंसिपल बनाने का निर्णय लिया। इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला कोर्ट पहुंचा।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि माइनॉरिटी संस्थान को यह पूरा अधिकार है कि वह अपनी पसंद का प्रिंसिपल नियुक्त करे। ऐसे मामलों में सीनियरिटी को थोपना संविधान के खिलाफ है। 

सरकारी सर्कुलर पर सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने 25 अगस्त 2021 और 08 सितम्बर 2021 के सर्कुलर को लेकर कहा कि ये सर्कुलर माइनॉरिटी संस्थानों पर लागू नहीं हो सकते। यह Article 30(1) of the Constitution of India का उल्लंघन है। यानी, सरकार यह तय नहीं कर सकती कि प्रिंसिपल कौन बनेगा।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

  • माइनॉरिटी संस्थान का अधिकार पूर्ण (absolute) है।
  • कोर्ट भी यह नहीं देखेगा कि चयन सही है या गलत।
  • जब तक व्यक्ति योग्य है, चयन में हस्तक्षेप नहीं होगा।

सिंगल बेंच का आदेश पलटा

अपने फैसले में डिवीज़न बेंच ने सिंगल बेंच के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें नए सिरे से नाम पर विचार का निर्देश दिया गया था। साथ ही अपील मंजूर करते हुए डॉ. एस.के. उपाध्याय को प्रिंसिपल का प्रभार देने का आदेश बरकरार रखा है। 

हाईकोर्ट का आदेश देखें   WA. 2405 of 2025

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