कोर्ट ने कहा- बिना ठोस आरोप और बिना भ्रष्टाचार के संकेत के हुई विभागीय कार्रवाई अवैध; प्रमोशन पर भी हटाया गया अड़ंगा
क्या था मामला
याचिकाकर्ता वीरेंद्र कुमार कटारे, जो वर्तमान में धार में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं, को वर्ष 2019 में एक चार्जशीट दी गई थी। उन पर आरोप थे कि उन्होंने 2013 में तहसीलदार रहते हुए भूमि नीलामी और नामांतरण से जुड़े मामलों में कथित गड़बड़ी की।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 6 साल की देरी से जारी चार्जशीट पूरी तरह अनुचित है। आरोप अस्पष्ट और आधारहीन हैं। किसी भी आरोप में भ्रष्टाचार या दुर्भावना (mala fide) का जिक्र नहीं है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों में तहसीलदार द्वारा दिए गए आदेश न्यायिक प्रकृति (quasi-judicial) के होते हैं, जिन पर इस तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती।
कानूनी सुरक्षा का मिला लाभ
अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में Judges (Protection) Act, 1985 के तहत अफसरों को संरक्षण मिलता है और केवल निर्णय गलत होने से अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हो सकती। कोर्ट ने Amresh Shrivastava v. State of Madhya Pradesh का हवाला देते हुए कहा कि बिना दुर्भावना या भ्रष्टाचार के आरोप के, न्यायिक कार्यों पर विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकती।
