LAW'S VERDICT

PMO शिकायत के बाद सस्पेंड EE को हाईकोर्ट से झटका: भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर नहीं मिली राहत

CBI की 5 FIR का हवाला, कोर्ट ने कहा- मामला गंभीर; अब CAT करेगा अंतिम फैसला

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मिल्ट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) के सस्पेंडेड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर धीरज कुमार को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोपों वाले मामले में फिलहाल न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है, खासकर तब जब जांच एजेंसी द्वारा कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हों। सोमवार को यह आदेश जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनाया, जिसमें याचिकाकर्ता द्वारा अपने निलंबन को चुनौती दी गई थी।

MES में EE के पद पर था याचिकाकर्ता 

धीरज कुमार, जो एमईएस जबलपुर में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे, उनके खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए। एके रहमान ने उसके खिलाफ पीएमओ और सेन्ट्रल विजिलेंस कमिश्नर के समक्ष शिकायतें भेजी थीं। इन शिकायतों के आधार पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने अपने निलंबन को चुनौती देते हुए दलील दी कि मामला पहले से ही Central Administrative Tribunal (CAT) में लंबित है, लेकिन वहां से राहत न मिलने के कारण उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

केंद्र सरकार ने किया खुलासा 

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ गंभीर कदाचार (misconduct) के आरोप हैं। Central Bureau of Investigation (CBI) द्वारा 5 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि इतने गंभीर मामलों में कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

आरोप गंभीर: हाईकोर्ट 

डिवीजन बेंच ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए माना कि:

  • आरोपों की प्रकृति गंभीर और जांच योग्य है।
  • इस स्तर पर निलंबन आदेश में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। 
  • न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है, खासकर जब जांच जारी हो।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निलंबन एक अंतरिम प्रशासनिक कार्रवाई है, जिसे जांच के दौरान बनाए रखा जा सकता है।इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी और निलंबन आदेश में कोई राहत देने से इंकार किया।  हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि Central Administrative Tribunal (CAT) मामले का गुण-दोष (merits) के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय करेगा। यानी, याचिकाकर्ता के पास अभी भी CAT के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर बना रहेगा।

क्या है इस फैसले का कानूनी महत्व

यह फैसला कई महत्वपूर्ण संकेत देता है:

  • भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में कोर्ट तत्काल राहत देने से बचता है।
  • निलंबन को जांच का हिस्सा मानकर वैध ठहराया जा सकता है।
  • जब मामला अन्य सक्षम मंच पर लंबित हो, तो हाईकोर्ट हस्तक्षेप सीमित रखता है।



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