LAW'S VERDICT

वारंट तामील न कराने पर हाईकोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी, भोपाल एसपी तलब

अवमानना मामले में आदिवासी कल्याण आयुक्त को भी पेश होने के निर्देश, छुट्टियों का बहाना कोर्ट ने किया खारिज

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अवमानना मामले में जारी जमानती वारंट तामील नहीं कराने पर कड़ा रुख अपनाते हुए भोपाल के पुलिस अधीक्षक (SP) को तलब किया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कहा कि सरकारी छुट्टियों का हवाला देकर वारंट तामील नहीं कराना स्वीकार्य नहीं है।

हाईकोर्ट ने मामले में आदिवासी कल्याण विभाग के आयुक्त संजीव सिंह को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की गई है।

फैमिली पेंशन नहीं मिलने पर दायर हुई थी याचिका

यह अवमानना याचिका रीवा जिले के जड़मनिया गांव निवासी शकुन्तला शर्मा द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि उनके पति रमाकांत शर्मा शासकीय हाईस्कूल पिपरही में भृत्य पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद भी परिवार को फैमिली पेंशन का लाभ नहीं दिया गया।

इस संबंध में पूर्व में दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2022 को आदेश देते हुए 90 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के दावे का निराकरण करने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद अवमानना याचिका दाखिल की गई।

गैरहाजिरी पर जारी हुआ था जमानती वारंट

मामले में नोटिस तामील होने के बावजूद संबंधित अधिकारी अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसे गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल 2026 को आदिवासी कल्याण आयुक्त के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था और वारंट तामील कराने की जिम्मेदारी भोपाल एसपी को सौंपी गई थी।

“छुट्टियों के कारण वारंट तामील नहीं हुआ”

सुनवाई के दौरान अरेरा हिल्स थाना के थाना प्रभारी द्वारा कोर्ट में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि 1 मई और उसके बाद सरकारी छुट्टियां होने के कारण आयुक्त के खिलाफ जारी जमानती वारंट तामील नहीं कराया जा सका।

हाईकोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए तीखी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि अधिकारी न केवल कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करते, बल्कि नोटिस मिलने के बाद भी अदालत में उपस्थित नहीं होते।

कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए भोपाल एसपी और आदिवासी कल्याण आयुक्त को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    CONC-722-2023

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