नई दिल्ली। पूजा पांडे को चर्चित सिवनी हवाला और कथित पुलिस उगाही मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने ₹1.45 करोड़ की कथित अवैध वसूली और भ्रष्टाचार मामले में जेल में बंद निलंबित पूर्व SDOP पूजा पांडे की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमल्या बागची की दो सदस्यीय खंडपीठ ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। अदालत ने जमानत देते समय इस तथ्य को विशेष महत्व दिया कि पूजा पांडे एक “सिंगल मदर” हैं और उनका 2-3 साल का मासूम बच्चा भी उनके साथ जेल में रह रहा है।
क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, मामला FIR नंबर 473/2025 से जुड़ा है, जो लखनवाड़ा थाना में दर्ज की गई थी। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराएं 310(2), 126(2), 140(3) और 61(2) लगाई गई हैं।
आरोप है कि अक्टूबर 2025 की रात तत्कालीन SDOP पूजा पांडे और पुलिस टीम ने एक Hyundai Creta कार को रोका था, जिसमें इरफान पठान और शेख मुख्तार सवार थे। जांच में वाहन से ₹2.96 करोड़ नकद मिलने की बात कही गई।
अभियोजन के अनुसार, पुलिस टीम ने कथित साजिश के तहत ₹1.45 करोड़ अपने पास रख लिए और बाकी रकम वाहन सवारों को छोड़ते हुए वापस कर दी। यह भी आरोप है कि उक्त राशि पूजा पांडे के निर्देश पर उनके कार्यालय में रखवाई गई थी।
पूजा पांडे की ओर से दावा: सिर्फ 1.45 करोड़ की राशि बरामद हुई
पूर्व SDOP पूजा पांडे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा, अधिवक्ता सुशील तिवारी, अभिषेक श्रीवास्तव व असीम त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि मामले में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया। बचाव पक्ष का दावा था कि केवल ₹1.45 करोड़ की राशि बरामद हुई थी, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में कुल रकम ₹2.96 करोड़ दर्शाई गई।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत क्यों दी?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि:
- जांच पूरी हो चुकी है
- चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है
- मामला फिलहाल चार्ज फ्रेमिंग के चरण में है
- ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है
- आरोपी महिला एक सिंगल मदर है
- 2-3 साल का बच्चा भी जेल में साथ रह रहा है
- फरार होने की संभावना नहीं है
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने पूजा पांडे को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या स्पष्ट किया?
पीठ ने यह भी साफ किया कि जमानत आदेश को मामले के मेरिट पर टिप्पणी नहीं माना जाएगा। ट्रायल कोर्ट स्वतंत्र रूप से सबूतों और दलीलों के आधार पर सुनवाई करेगा।
सुको का आदेश देखें Special Leave to Appeal (Crl.) No. 5296/2026
