LAW'S VERDICT

‘बनखेड़ी में अंडरपास नहीं तो 100 गांवों की बढ़ेगी परेशानी’

पिपरिया-बनखेड़ी आरओबी पर हाईकोर्ट सख्त,  सरकार से मांगा जवाब

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम जिले के पिपरिया-बनखेड़ी मार्ग पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के कारण करीब 100 गांवों का संपर्क प्रभावित होने के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि यदि आरओबी के नीचे अंडरपास की व्यवस्था नहीं की गई तो हजारों ग्रामीणों को अनावश्यक रूप से लगभग 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी शामिल हैं, ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई जून के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है।

जनहित याचिका में उठाया गया ग्रामीणों की आवाजाही का मुद्दा

यह जनहित याचिका बनखेड़ी के व्यापारी धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव और आयुष अग्रवाल की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि पिपरिया-बनखेड़ी रेलवे लाइन पर बन रहे रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण से पुल के दोनों ओर बसे लगभग 100 गांवों के लोगों का पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित हो रहा है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, चांदोन रोड से रेलवे स्टेशन तक जाने के लिए वर्षों से एक स्थापित सड़क मार्ग मौजूद था, लेकिन आरओबी निर्माण के दौरान इस मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया। इससे ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर ग्रामीण

याचिका में दावा किया गया है कि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण हजारों ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं। साथ ही कहा गया है कि यदि आरओबी के नीचे अंडरपास नहीं बनाया गया तो लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ेगा।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि इस समस्या को लेकर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मजबूर होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

कोर्ट ने मांगा सरकार का पक्ष

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मोहन लाल शर्मा ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ऋत्विक पाराशर उपस्थित हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता को आवश्यक निर्देश प्राप्त कर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद

हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आरओबी निर्माण के साथ अंडरपास या अन्य वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों गांवों का संपर्क बना रहे और लोगों को आवागमन में कठिनाई न हो।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     WP-8358-2026

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