नए प्रशासनिक भवन निर्माण के लिए चल रही कार्रवाई पर अंतरिम आदेश
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नवगठित मऊगंज जिले में प्रशासनिक भवन निर्माण के लिए आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मकान तोड़े जाने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 1 जून को निर्धारित की है।
जस्टिस विवेक जैन और अजय कुमार निरंकारी की वेकेशन बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।
प्रशासनिक भवन के लिए हटाए जा रहे थे मकान
जनहित याचिका मऊगंज जिले के शहपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बलभद्रगढ़ निवासी पूर्व जनपद सदस्य बसंत लाल कोल की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि ग्राम घुरेहटा कला (वार्ड क्रमांक-11) में दशकों से अनुसूचित जनजाति एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार निवास कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता के अनुसार राज्य सरकार और प्रशासन ने इन परिवारों के कब्जे को मान्यता देते हुए उन्हें भूमि के पट्टे प्रदान किए थे। इसके अलावा विभिन्न सरकारी आवास योजनाओं के तहत लाभ देकर पक्के मकानों का निर्माण भी कराया गया था।
बिना पुनर्वास के बेदखली का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिला मुख्यालय के प्रशासनिक भवनों के निर्माण के लिए इन परिवारों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था, पुनर्वास योजना अथवा विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए जेसीबी मशीनों की सहायता से हटाया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि जब तक प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक किसी भी प्रकार की बेदखली और तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
हाईकोर्ट ने मांगा शासन का पक्ष
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगा दी। साथ ही शासकीय अधिवक्ता को शासन से निर्देश प्राप्त कर अदालत के समक्ष विस्तृत पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा और गोपाल कृष्ण गौतम ने पक्ष रखा।
1 जून को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल प्रभावित आदिवासी और गरीब परिवारों को राहत मिली है। अब राज्य सरकार को अपने रुख और कार्रवाई के औचित्य को लेकर अदालत के समक्ष जवाब प्रस्तुत करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 1 जून को होगी।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-19191-2026
