जमानती वारंट की आड़ में पूर्व महिला रजिस्ट्रार को कस्टडी में लेने का मामला, 13 मई को अगली सुनवाई
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जमानती वारंट की आड़ में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय की पूर्व महिला रजिस्ट्रार नीरजा नामदेव को हिरासत में लेने के मामले में पुलिस प्रशासन पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने एसडीओपी राजेश सिंह बंजारे और एसआई नेहा सिंह ठाकुर से शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए कहा है कि यदि बयान गलत पाए गए तो अधिकारियों को उसका परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विशाल मिश्रा ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि “कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से पुलिस के साथ कोर्ट नहीं आता।” अदालत ने दोनों पुलिस अधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, विश्वविद्यालय की रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रमिला सिंह ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल 2026 को वर्तमान रजिस्ट्रार की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 25 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी किया था।
आरोप है कि चित्रकूट पुलिस भोपाल पहुंची और पूर्व रजिस्ट्रार नीरजा नामदेव को हिरासत में लेकर जबलपुर लाई। हालांकि, इससे पहले ही अदालत ने मुख्य मामले का निराकरण कर दिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से पेश अधिवक्ता पारितोष गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने जमानती वारंट की आड़ में पूर्व रजिस्ट्रार को कस्टडी में रखा।
पुलिस ने कोर्ट में क्या कहा?
गुरुवार को अदालत में उपस्थित हुए एसडीओपी राजेश सिंह बंजारे ने कहा कि पुलिस ने महिला रजिस्ट्रार को मुचलका भरने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने स्वयं इससे इनकार किया और अपनी इच्छा से पुलिस के साथ कोर्ट आने की बात कही।
पुलिस के इस बयान का विरोध करते हुए विश्वविद्यालय के अधिवक्ता पारितोष गुप्ता ने इसे तथ्यहीन बताया। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने बयान शपथपत्र पर दर्ज करें।
हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में पुलिस अधिकारियों का बयान गलत पाया गया, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी और कानून के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CONC-2047-2025
