LAW'S VERDICT

MP OBC Reservation Case: हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई शुरू हुई

सामान्य वर्ग की दलील- ओबीसी की आबादी 52 फीसदी होने का ये मतलब नहीं कि आरक्षण 63% हो जाए 

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही बहुचर्चित कानूनी लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान बढ़े हुए आरक्षण का विरोध कर रहे पक्ष ने अदालत में दलील दी कि केवल जनसंख्या के आधार पर आरक्षण तय नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले की आगे की सुनवाई गुरुवार दोपहर 3 बजे से 4:30 बजे तक तय की है।

“52% आबादी आरक्षण बढ़ाने का संवैधानिक आधार नहीं”

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ओबीसी आबादी 52 प्रतिशत से अधिक होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन केवल जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर आरक्षण की सीमा तय करना संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है।

उन्होंने अदालत को बताया कि—

  • पहले ओबीसी को 14% आरक्षण मिलता था
  • इसे बढ़ाकर 27% किया गया
  • अनुसूचित जाति को 16%
  • अनुसूचित जनजाति को 20% आरक्षण दिया जा रहा है

इस तरह कुल आरक्षण 63 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 50 प्रतिशत सीमा से अधिक है।

कमलनाथ सरकार के फैसले को चुनौती

यह मामला अशिता दुबे सहित अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है। याचिका में तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार की कमलनाथ सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किए जाने को चुनौती दी गई है। सरकार ने 8 जुलाई 2019 को विधानसभा से बिल पारित कराया था और 17 जुलाई 2019 को इसका गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था। वहीं कई याचिकाएं आरक्षण को बढ़ाकर 27 फीसदी किये जाने के समर्थन में दाखिल हुई हैं।

“सरकारों ने गलती सुधारी नहीं, दोहराई”

वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी ने अदालत में कहा कि तत्कालीन सरकार ने बिना पर्याप्त अध्ययन और संवैधानिक परीक्षण के आरक्षण बढ़ाया। बाद में सत्ता में आई भाजपा सरकार ने भी उसी व्यवस्था को जारी रखा।

उन्होंने कहा कि आरक्षण का निर्धारण संवैधानिक सीमाओं और न्यायिक दिशानिर्देशों के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक या जनसंख्या आधारित गणना से।

हाईकोर्ट के बाहर जुटे बड़ी संख्या में उम्मीदवार

मामले की सुनवाई को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार हाईकोर्ट पहुंचे। कई अभ्यर्थियों ने महाधिवक्ता निवास से हाईकोर्ट परिसर तक रैली भी निकाली। ओबीसी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के अनुसार, होल्ड किए गए उम्मीदवारों को पुलिस ने हाईकोर्ट परिसर के बाहर रोक दिया। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े लाखों उम्मीदवारों की नजरें अब इस मामले में आने वाले हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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