हरदा में स्कूल विलय के खिलाफ जनहित याचिका, कहा- “बच्चे 9 किमी दूर जाएँ, या पढ़ाई छोड़ें”
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हरदा जिले के एक सरकारी स्कूल को 9 किलोमीटर दूर शिफ्ट किए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने अनावेदकों को जवाब पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी।
“स्कूल 9 किमी दूर, बच्चों के सामने पढ़ाई छोड़ने की नौबत”
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हरदा के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के तहत कई गांवों के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को 9 किलोमीटर दूर स्थित संदीपनि स्कूल, खिरकिया में विलय कर दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले से ग्रामीण और गरीब परिवारों के सैकड़ों बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। छोटे बच्चों के लिए रोजाना 9 किलोमीटर दूर स्कूल जाना व्यावहारिक नहीं है।
शिक्षा का अधिकार कानून का हवाला
जनहित याचिका में कहा गया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार—
- प्राथमिक स्कूल 1 किलोमीटर के भीतर होना चाहिए
- माध्यमिक स्कूल 3 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए
लेकिन मोहाल कलां से खिरकिया स्थित स्कूल की दूरी करीब 9 किलोमीटर है, जो नियमों के खिलाफ बताई गई है।
किसने लगाई याचिका?
यह जनहित याचिका हरदा के स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद भोरगा, समाजसेवी मुकेश चौहान और ग्राम पंचायत मोहल कलां की सरपंच मनीषा आमे की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने डीईओ के आदेश को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि यह बच्चों के मौलिक अधिकारों और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने माँगा जवाब
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार चौरसिया ने पक्ष रखा। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला अब ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था, स्कूल विलय नीति और बच्चों की शिक्षा तक पहुंच के अधिकार को लेकर अहम कानूनी बहस बनता जा रहा है।
