LAW'S VERDICT

“गलती से Yes टिक हुआ” की दलील खारिज, मप्र हाईकोर्ट ने नई मेरिट लिस्ट बनाने का दिया आदेश


जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 में कथित फर्जी बोनस अंक मामले पर बड़ा फैसला सुनाते हुए हजारों अभ्यर्थियों को झटका दिया है। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार और मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को वर्तमान चयन सूची वापस लेकर नई मेरिट लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा कि भर्ती प्रक्रिया में गलत जानकारी देकर फायदा लेने की कोशिश करने वाले उम्मीदवारों को किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट के इस फैसले से 14,964 आवेदनों की दोबारा जांच होगी।

क्या है पूरा मामला?

प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में कुल 13,089 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। भर्ती नियम पुस्तिका के खंड 7.7 के तहत आरसीआई (Rehabilitation Council of India) से मान्यता प्राप्त स्पेशल एजुकेशन डिप्लोमा धारकों को 5 प्रतिशत बोनस अंक देने का प्रावधान था।

सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि पूरे मध्य प्रदेश में केवल 5,271 अभ्यर्थियों के पास ही वैध आरसीआई प्रमाणपत्र मौजूद हैं, लेकिन 14,964 उम्मीदवारों ने आवेदन में बोनस अंक पाने के लिए “हाँ” विकल्प चुन लिया।

हाईकोर्ट ने कहा- यह मासूम गलती नहीं, सुनियोजित धोखाधड़ी

सुनवाई के दौरान कई अभ्यर्थियों ने कोर्ट में दलील दी कि उनसे गलती से “हाँ” टिक हो गया था और वे अब बोनस अंक छोड़कर सामान्य मेरिट में शामिल होना चाहते हैं।

लेकिन अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि परिणाम घोषित होने के बाद यू-टर्न लेना स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि ऐसे उम्मीदवारों को राहत दी गई तो यह ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।

हाईकोर्ट के सख्त आदेश

  • वर्तमान चयन सूची तत्काल वापस ली जाए
  • सभी 14,964 आवेदनों की जांच की जाए
  • जिन अभ्यर्थियों ने वैध आरसीआई दस्तावेज अपलोड नहीं किए, उनके आवेदन निरस्त किए जाएं
  • तीन महीने के भीतर नई संशोधित मेरिट सूची जारी की जाए

भर्ती प्रक्रियाओं के लिए अहम माना जा रहा फैसला

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बगरेचा और विशाल बघेल ने पैरवी की। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य की सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं के लिए मिसाल बन सकता है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि ऑनलाइन आवेदन में दी गई जानकारी की जिम्मेदारी पूरी तरह अभ्यर्थी की होगी और गलत घोषणा को बाद में “मानवीय भूल” बताकर बचा नहीं जा सकेगा।

हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-12970-2026

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