27% OBC आरक्षण को चुनौती, सामान्य वर्ग ने कहा- सुप्रीम कोर्ट की सीमा तोड़कर मप्र में 63% आरक्षण लागू
जबलपुर। Madhya Pradesh High Court में मध्यप्रदेश के 27% ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान सामान्य वर्ग की ओर से राज्य सरकार पर संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया। गुरुवार को हुई सुनवाई में कहा गया कि Indra Sawhney Judgment में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट सीमा तय की थी कि आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे बढ़ाकर 63 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 16 जून तय की है।
कमलनाथ सरकार के फैसले को दी गई चुनौती
यह पूरा मामला अशिता दुबे और 11 अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें तत्कालीन Kamal Nath सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था।
राज्य सरकार ने 8 जुलाई 2019 को विधानसभा से यह विधेयक पारित कराया था और 17 जुलाई 2019 को इसका गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संवैधानिक सीमा दोनों के खिलाफ है।
हाईकोर्ट में 89 मामलों पर एक साथ सुनवाई
गुरुवार को इस मुद्दे से जुड़े 89 मामलों पर एक साथ सुनवाई हुई। सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Aman Lekhi ने अपनी दलीलें पूरी कीं।
अब अगली सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता Aditya Sanghi अदालत में पक्ष रखेंगे। उनके बाद सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता Shobha Gupta अपनी दलीलें पेश करेंगी।
प्रदेश की राजनीति और भर्ती प्रक्रियाओं पर नजर
मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण का मामला लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बना हुआ है। इस केस के फैसले का असर सरकारी नौकरियों, भर्ती परीक्षाओं और प्रदेश की आरक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है।
