LAW'S VERDICT

शहपुरा पुल हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, NHAI समेत सभी पक्षों को नोटिस

8-8 घंटे के जाम और टोल वसूली को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर 4 सप्ताह में मांगा जवाब

Madhya Pradesh High Court ने जबलपुर-भोपाल हाईवे पर स्थित शहपुरा ओवरब्रिज के ध्वस्त होने और उससे पैदा हुए भीषण ट्रैफिक संकट को लेकर दायर जनहित याचिका पर केन्द्र सरकार, National Highways Authority of India और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

जस्टिस D D Bansal और जस्टिस B P Sharma की वेकेशन बेंच ने सभी पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जून 2026 के अंतिम सप्ताह में होगी।

628 करोड़ का पुल तीन साल में धराशायी

याचिका में कहा गया है कि करीब 628 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2023 में निर्मित शहपुरा ओवरब्रिज का एक हिस्सा अगस्त-सितंबर 2025 में आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ था, जबकि 23 फरवरी 2026 को पुल का हिस्सा पूरी तरह गिर गया।

याचिकाकर्ता Rajesh Singh Rajput ने आरोप लगाया कि पुल ध्वस्त होने के बाद भी प्रशासन ने पास स्थित पाउड़ी रेलवे गेट वाले सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग को शुरू नहीं किया। इसके बजाय भारी वाहनों सहित चार-लेन हाईवे का ट्रैफिक शहपुरा नगर की संकरी गलियों और कृषि मंडी क्षेत्र से गुजारा जा रहा है।

रोज 8 घंटे तक लग रहा जाम

याचिका के अनुसार, इस अव्यवस्थित ट्रैफिक डायवर्जन के कारण प्रतिदिन 4 से 8 घंटे तक लंबा जाम लग रहा है।

  • एम्बुलेंस घंटों फंस रही हैं
  • स्कूली बच्चों और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है
  • मंडी क्षेत्र में लगातार दुर्घटना का खतरा बना हुआ है
  • पूरे इलाके में धुआं, शोर और ट्रैफिक अराजकता फैल गई है

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

टोल वसूली पर भी सवाल

जनहित याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि जब हाईवे का हिस्सा ही ध्वस्त हो चुका है तो शहपुरा टोल प्लाजा पर पूरा टोल आखिर किस आधार पर वसूला जा रहा है।

याचिका में टोल वसूली को “जनता से खुली लूट” बताते हुए मांग की गई है कि पुल पूरी तरह चालू होने तक टोल वसूली पर रोक लगाई जाए और पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

इन पक्षों को बनाया गया प्रतिवादी

याचिका में Government of Madhya Pradesh, Government of India, पश्चिम मध्य रेलवे के डीआरएम, National Highways Authority of India, जबलपुर कलेक्टर, Madhya Pradesh Road Development Corporation और संबंधित टोल प्लाजा को पक्षकार बनाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता Aditya Singh Rajput ने पक्ष रखा।

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