मानहानि केस से जुड़ी पुनरीक्षण याचिका पर हाईकोर्ट में अगली तारीख तय
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के खिलाफ दायर मानहानि मामले से जुड़ी पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई टल गई है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से किए गए आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित की है।
उमा के बयान से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान दिए गए एक कथित बयान से जुड़ा है। आरोप है कि उमा भारती ने मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों को आधार बनाकर दिग्विजय सिंह ने भोपाल की सीजेएम (Chief Judicial Magistrate) अदालत में मानहानि (Defamation) का मुकदमा दायर किया था।
निचली अदालत से हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला
इस केस में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
- ट्रायल के दौरान दिग्विजय सिंह की ओर से सभी गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
- इसके बाद उमा भारती की ओर से बचाव साक्षी के रूप में नरेन्द्र बिरथरे का बयान दर्ज कराया गया। दिग्विजय सिंह की ओर से मांग की गई कि:
- नरेन्द्र बिरथरे को पुनः अदालत में बुलाकर प्रति-परीक्षण (Cross Examination) किया जाए।
लेकिन:
- 29 अगस्त 2017 को सीजेएम कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी।
- इसके बाद एडीजे (Additional District Judge) कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई।
- 25 सितंबर 2017 को वहां भी अर्जी खारिज हो गई।
अंततः यह मामला वर्ष 2017 में हाईकोर्ट पहुंचा
हाईकोर्ट में क्या हुआ
मामले की सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह की ओर से अधिवक्ता राजीव मिश्रा उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत से समय (Adjournment) की मांग की। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुनवाई को स्थगित कर दिया।
अब इस बहुचर्चित मामले पर अगली सुनवाई 17 जून 2026 को होगी।
कानूनी दृष्टिकोण: क्यों अहम है यह मामला
यह केस कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं से जुड़ा है:
- मानहानि कानून (Defamation Law) के तहत राजनीतिक बयानबाजी की सीमा।
- गवाहों के प्रति-परीक्षण का अधिकार।
- निचली अदालतों के आदेशों की न्यायिक समीक्षा (Revision Jurisdiction)।
राजनीतिक महत्व
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें:
- दो प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं।
- मामला चुनावी बयानबाजी से जुड़ा है।
- फैसला भविष्य में राजनीतिक भाषणों और आरोपों पर असर डाल सकता है।
