जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भोपाल के बर्खास्त पुलिस इंस्पेक्टर राजेश कुमार त्रिपाठी के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताते हुए उसको फिलहाल कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि महिला के सम्मान से खिलवाड़ करने वाले अधिकारी से समाज की महिलाओं की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा, “हमने घटना का वीडियो देखा है। यह तरीका शर्मनाक था। इस मामले में न्याय होगा, जरूर होगा।”
हाईकोर्ट ने फिलहाल इंस्पेक्टर को कोई राहत देने से इनकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 तय की है।
डायल 100 के कण्ट्रोल रूम में हुई थी घटना
घटना भोपाल के डायल 100 कंट्रोल रूम की है। आरोप है कि 30-31 अगस्त 2025 की रात इंस्पेक्टर राजेश कुमार त्रिपाठी ने पुरुष कर्मचारियों के शराब सेवन की जांच करने के लिए एक महिला कर्मचारी को खड़ा किया और फिर सभी पुरुष कर्मचारियों को उसके चेहरे पर फूंक मारने को कहा।
इस प्रक्रिया से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कौन कर्मचारी शराब के नशे में है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद 8 सितंबर 2025 को राज्य सरकार ने इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया था।
सिंगल बेंच ने दिया था राहत, सरकार पहुंची डिवीजन बेंच
इंस्पेक्टर त्रिपाठी ने बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 19 फरवरी 2026 को सिंगल बेंच ने कहा था कि बिना विभागीय जांच के बर्खास्तगी उचित नहीं है और आदेश रद्द कर दिया था।
इसके खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने अपील दायर की। पिछली सुनवाई में डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट ने पूछा- ऐसी हरकत पर नरमी क्यों?
बुधवार को सुनवाई में उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी उपस्थित हुए। इंस्पेक्टर की ओर से राहत की मांग की गई और कहा गया कि बिना विभागीय जांच इतनी कठोर कार्रवाई नहीं हो सकती।
इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा:
- ऐसे मामले में सख्त कार्रवाई होना ही चाहिए।
- जो अधिकारी अपने दफ्तर की महिला कर्मी के सम्मान की रक्षा नहीं कर सका, वह समाज की महिलाओं की सुरक्षा कैसे करेगा।
- महिला को ‘टेस्टिंग टूल’ बनाना महिला का गंभीर अपमान है।
क्यों अहम है मामला?
यह मामला सरकारी दफ्तरों में महिलाओं के सम्मान, कार्यस्थल सुरक्षा और पुलिस विभाग की जवाबदेही से जुड़ा माना जा रहा है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ने साफ संकेत दिया है कि महिला गरिमा से जुड़े मामलों में अदालत नरमी के मूड में नहीं है।
