LAW'S VERDICT

राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र पर लो फैसला

हाईकोर्ट ने कहा: फैसला न हुआ तो फिर खुलेगा कोर्ट का दरवाजा

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर बड़ा आदेश दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की डिवीज़न बेंच ने हाई लेवल स्क्रूटनी कमेटी को निर्देश दिया है कि वह 60 दिनों के भीतर मामले का अंतिम निर्णय करे।

यह जनहित याचिका कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष Pradeep Ahirwar द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मंत्री प्रतिमा बागरी के पक्ष में जारी जाति प्रमाणपत्र फर्जी है। याचिकाकर्ता का दावा था कि महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड क्षेत्रों में बागरी जाति राजपूत समुदाय में मानी जाती है, जबकि निमाड़ और मालवा क्षेत्र में इसे अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल किया गया है।

चुनाव लड़ने पर उठे सवाल

याचिका में कहा गया कि प्रतिमा बागरी ने सतना जिले की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा, जबकि वह कथित रूप से अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित नहीं हैं। इस संबंध में पहले राज्य स्तरीय जाति प्रमाणपत्र परीक्षण प्राधिकरण को शिकायत दी गई थी, लेकिन दो माह तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

कोर्ट ने दिए फैसला लेने के आदेश 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार अग्रवाल ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने दलीलें दीं। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए हाई लेवल स्क्रूटनी कमेटी को निर्देश दिया कि वह 60 दिन के भीतर उचित आदेश पारित करे।

30 जून तक फैसला नहीं तो फिर याचिका

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि 30 जून 2026 तक कमेटी निर्णय नहीं लेती है, तो याचिकाकर्ता को दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की स्वतंत्रता रहेगा।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल

इस आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मामला सीधे राज्य मंत्री के जाति प्रमाणपत्र और आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने से जुड़ा है। अब सबकी नजर हाई लेवल स्क्रूटनी कमेटी के फैसले पर टिकी है।

हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-8658-2026

Post a Comment

Previous Post Next Post