हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाकर दिया अंतरिम आदेश, जबलपुर के डीईओ से मांगी रिपोर्ट
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दिव्यांग (स्पेशल) बच्चों के अधिकारों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए जबलपुर के 2 निजी स्कूलों द्वारा ऐसे छात्रों को निकाले जाने पर तत्काल रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने सोमवार को दिए अपने अंतरिम आदेश के जरिये यह स्पष्ट संदेश दिया कि विशेष बच्चों के साथ भेदभाव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
किन स्कूलों पर लगा प्रतिबंध?
यह आदेश विशेष रूप से जबलपुर के विजडम वैली स्कूल और गीड़ि गोयनका स्कूल के खिलाफ सामने आई शिकायतों के बाद दिया गया है, जहां आरोप था कि वहां स्पेशल बच्चों को स्कूल से निकाला जा रहा है।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश
डिवीजन बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पेशल बच्चों को निकाले जाने पर तत्काल रोक लगाई। आदेश के पालन की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को सौंपी और जबलपुर के सभी स्कूलों में पढ़ रहे विशेष बच्चों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की। अगली सुनवाई 29 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
याचिका में क्या उठाए गए मुद्दे?
याचिकाकर्ता सौरभ सुबैया की ओर से दायर जनहित याचिका में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया कि:
- जबलपुर में करीब 50 सरकारी और 200 निजी स्कूल संचालित हैं।
- कई छात्र सुनने और बोलने में अक्षम (दिव्यांग) हैं।
- कानून के बावजूद स्कूलों में विशेष शिक्षक (Special Educators) नियुक्त नहीं हैं।
याचिका में यह भी कहा गया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009
जैसे कानूनों का पालन जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा, जो पूरी तरह अवैधानिक है।
स्पेशल बच्चों को निकालने का लगा आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिवेन्द्र पाण्डेय ने कोर्ट को बताया कि दो निजी स्कूलों द्वारा स्पेशल बच्चों को बाहर किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत हस्तक्षेप किया।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह आदेश कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इस अंतरिम आदेश के जरिये समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को मजबूती देने, निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने और दिव्यांग बच्चों के अधिकारों की न्यायिक सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
