गवाहों के फिक्सिंग खेल को रोकने नया सिस्टम बनाएगी जस्टिस अग्रवाल की कमेटी, पूरे देश में होगा लागू
नई दिल्ली। देश की न्याय व्यवस्था में गवाहों की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस ए अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा है कि एफआईआर और चार्जशीट में गवाहों के नाम सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब इस पूरी व्यवस्था को सुधारने के लिए देशभर में गवाहों के चयन और परीक्षण का एक समान और पारदर्शी तरीका लागू किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण पहल के तहत शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जो देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सुझाव लेकर एक ठोस प्रणाली तैयार करेगी। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके आधार पर गवाहों के चयन की नई प्रक्रिया लागू की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को न्यायिक सुधार की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
कमजोर पड़ जाते हैं गंभीर मामले
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान में कई मामलों में ऐसे गवाहों के नाम शामिल कर दिए जाते हैं, जो या तो घटना स्थल पर मौजूद नहीं होते या फिर बाद में बयान देने से मुकर जाते हैं। इससे न केवल मुकदमों की निष्पक्षता प्रभावित होती है, बल्कि आरोपियों को भी इसका लाभ मिल जाता है और कई गंभीर मामले कमजोर पड़ जाते हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि पुलिस और जांच एजेंसियां कई बार बिना ठोस आधार के गवाहों को सूची में जोड़ देती हैं। इससे अदालत में पेश होने पर गवाह अपने बयान से पलट जाते हैं, जिससे पूरा केस कमजोर हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाहों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना न्याय प्रणाली की रीढ़ है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
थानेदार ने अपने ड्राइवर और कुक का बनाया गवाह
इस मुद्दे को उजागर करने वाले एक मामले में सामने आया कि इंदौर के एक थानेदार चंद्रमणि पटेल ने अपने ड्राइवर और कुक को 100 से अधिक मामलों में गवाह बना दिया था। इस खुलासे के बाद कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर अनियमितता माना। कोर्ट ने निर्देश दिया कि गवाहों का चयन केवल वास्तविक घटनास्थल पर मौजूद व्यक्तियों में से ही किया जाए और उनकी भूमिका की उचित जांच-पड़ताल की जाए। साथ ही, गवाहों को किसी भी प्रकार के दबाव या प्रभाव से मुक्त रखने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने होंगे।
सुको ने बनाई 7 सदस्यीय स्पेशल कमेटी
सर्वोच्च न्यायलय द्वारा गठित समिति में कानूनी विशेषज्ञों, अभियोजन अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि सभी पहलुओं पर विचार कर एक प्रभावी प्रणाली तैयार की जा सके। इस प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया जाएगा, जिससे गवाहों की पहचान और सत्यापन अधिक सटीक हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नई व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी। साथ ही, झूठे गवाहों और फर्जी गवाही पर भी अंकुश लगेगा।
कौन-कौन रहेगा कमेटी में
अध्यक्ष: जस्टिस विवेक अग्रवाल
सदस्य: केएम नटराज, एसडी संजय, सिद्धार्थ दवे, एस नागामुथु, संजय हेगड़े, हरिनारायण चारी मिश्र (आईपीएस)
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