LAW'S VERDICT

OBC आरक्षण में तकनीकी पेंच, अब ढाई बजे से होगी सुनवाई

 

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री कार्यालय को कहा- पता करो सुप्रीम कोर्ट से रिकॉर्ड आया या नहीं?  

जबलपुर। Madhya Pradesh High Court में मध्यप्रदेश के OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के मामले में मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही एक तकनीकी पेंच सामने आया। एक पक्षकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कहा कि इन मामलों को लेकर उन दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना जरूरी है जो सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में लगे हुए हैं। इस दलील पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ  की डिवीजन बेंच ने माना कि रिकॉर्ड को देखना जरूरी हो गया है। बेंच ने रजिस्ट्री कार्यालय को इस बात का पता लगाने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट से 4  मामलों के रिकॉर्ड आये हैं या नहीं। यदि रिकॉर्ड आ गया हो, तो वह ढाई बजे पेश किया जाये। इस मत के साथ डिवीज़न बेंच ने मामलों की सुनवाई लंच के बाद ढाई बजे के करने के निर्देश दिए हैं।  

वेबसाइट न खुलने से आई अड़चन 

सुनवाई के दौरान डिवीज़न बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से दस्तावेजों का परीक्षण करने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं खुली। बेंच ने कोर्ट में मौजूद पक्षकारों के वकीलों से पूछा कि क्या सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट किसी के पास खुल रही है? वेबसाइट न खुलने के मद्देनजर डिवीज़न बेंच ने रजिस्ट्री कार्यालय को रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश देकर सुनवाई मुल्तवी कर दी।

आज विरोध पक्ष रखेगा दलीलें

डिवीजन बेंच ने बीते सोमवार को सुनवाई का पैमाना तय करके बहस को दो खेमों में बांटा था। पहला खेमा उनका है जो ओबीसी के आरक्षण को बढाए जाने का विरोध कर रहे हैं। दूसरा खेमा उनका है जो आरक्षण बढाए जाने का समर्थन कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने तय किया था कि मंगलवार को 27 प्रतिशत आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं पर पहले सुनवाई होगी। अशिता दुबे और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी अपनी दलीलें पेश करेंगे।

कमलनाथ सरकार के फैसले को चुनौती

गौरतलब है कि मप्र की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने OBC वर्ग के आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इसके लिए 8 जुलाई 2019 को विधानसभा में बिल पारित किया गया था और 17 जुलाई 2019 को इसका गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ था।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आरक्षण प्रतिशत बढ़ाना असंवैधानिक है और भारत के सर्वोच्च न्यायलय  द्वारा तय 50 प्रतिशत सीमा संबंधी दिशानिर्देशों के विपरीत है।

मध्यप्रदेश की राजनीति और भर्ती प्रक्रिया पर असर

OBC आरक्षण का यह मामला मध्यप्रदेश की राजनीति, सरकारी भर्तियों और आरक्षण व्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है। लाखों उम्मीदवारों हाईकोर्ट के आने वाले फैसले से सीधे तौर पर जुड़े हैं। उन सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित फैसले पर टिकी हैं।


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