नर्सिंग फर्जीवाड़े में रिजल्ट घोषित करने की अनुमति देने से हाईकोर्ट ने किया इंकार
जबलपुर: मध्यप्रदेश में नर्सिंग फर्जीवाड़े के मामले में बड़ा झटका सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने करीब 30 हजार GNM (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) छात्रों का रिजल्ट जारी करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि बिना पूरी जांच के रिजल्ट घोषित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि सभी 30 हजार छात्रों का डिटेल रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाए। यह बताया जाए कि किस छात्र ने किस कॉलेज से एडमिशन लिया? छात्रों ने नियमित क्लास अटेंड की या नहीं?
अगली सुनवाई 24 अप्रैल को तय की गई है।
“कॉलेज नहीं, शटर वाली दुकान”: कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान पेश की गई तस्वीरों को देखकर कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई तथाकथित नर्सिंग कॉलेज सिर्फ नाम के पाए गए। बेंच ने कहा कि “ये कॉलेज नहीं, शटर वाली दुकान हैं”। कोर्ट ने सवाल उठाया कि ऐसे संस्थानों से पढ़कर छात्र मेडिकल प्रोफेशन में कैसे जा सकते हैं।
अमान्य कॉलेजों को मान्यता नहीं
इटारसी के कुछ छात्रों ने कोर्ट से अपील की कि उनका कोर्स पूरा हो चुका है। उन्हें किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज में ट्रांसफर कर परीक्षा देने की अनुमति दी जाए। लेकिन कोर्ट ने इसे सख्ती से खारिज कर दिया और कहा_
“हम इस तरह अमान्य कॉलेजों पर अपनी मुहर नहीं लगा सकते”
“कौन सही, कौन नहीं- यह पता लगाना जरूरी”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन छात्रों ने मान्यता प्राप्त कॉलेजों में पढ़ाई की है, वही योग्य माने जाएंगे। फर्जी कॉलेजों से जुड़े छात्रों की पात्रता की जांच जरूरी है। यह पूरा मामला लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा वर्ष 2022 में दायर जनहित याचिका के आधार पर सामने आया। याचिकाकर्ता की और से अधिवक्ता आलोक बगरेचा ने पक्ष रखा।
छात्रों के भविष्य पर संकट
हाईकोर्ट के इस रुख के बाद हजारों छात्रों का करियर अनिश्चित हो गया है। नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सरकार और शिक्षा संस्थानों की जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।
