दो पुरुष उम्मीदवारों की याचिका पर हाईकोर्ट ने माँगा राज्य सरकार सहित 4 से जवाब
जबलपुर। मप्र में नर्सिंग ऑफिसर भर्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 2 अप्रैल 2026 को जारी विज्ञापन में 1,256 पदों को पूरी तरह महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया, जिससे योग्य पुरुष उम्मीदवारों को सीधे तौर पर बाहर कर दिया गया है। इस आदेश की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने राज्य सरकार व 3 अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने कहा है। अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
सिवनी के विनोद सिसोदिया और रीवा के रामगोपाल चक्रवर्ती की ओर से दाखिल इस याचिका में कहा गया है कि यराज्य सरकार का 2 अप्रैल 2026 का आदेश न केवल समानता के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि रोजगार में समान अवसर और लैंगिक भेदभाव के निषेध के भी खिलाफ है। खास बात यह है कि राज्य के नियम खुद महिलाओं के लिए अधिकतम 35% आरक्षण की अनुमति देते हैं, लेकिन यहां सीधे 100% पद महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिए गए, जो अवैधानिक है।
“एक ही पढ़ाई, एक ही परीक्षा… फिर भी बाहर!”
याचिका में साफ कहा गया है कि पुरुष और महिला नर्सिंग उम्मीदवार एक ही कोर्स पढ़ते हैं। एक ही प्रशिक्षण लेते हैं। एक ही परीक्षा पास करते हैं। इसके बावजूद केवल लिंग के आधार पर पुरुषों को बाहर करना पूरी तरह मनमाना और अन्यायपूर्ण है। कानून भी इस भेदभाव को सही नहीं ठहराता। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1972 में “नर्स” की परिभाषा में पुरुष भी शामिल हैं, यानी पेशा खुद जेंडर-न्यूट्रल है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया नहीं।
“2017 से शुरू हुआ भेदभाव, 2026 में चरम पर”
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह मामला नया नहीं है। 2011 में पहली बार महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण लागू किया गया था। वर्ष 2017 में पुरुषों के लिए अलग पोस्ट बनाई गई, लेकिन संख्या बेहद कम रखी गई (667 बनाम 10,720) और अब 2026 में तो हद हो गई, जब सभी 1256 पद सिर्फ महिलाओं के लिए रिजर्व कर दिए गए।
याचिकाकर्ताओं ने इसे “सिस्टमैटिक एक्सक्लूजन” करार दिया है।
“नाम बदला, सोच नहीं”
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में “स्टाफ नर्स” का नाम बदलकर “नर्सिंग ऑफिसर” कर दिया, जो सुनने में जेंडर-न्यूट्रल है। लेकिन हकीकत में भर्ती प्रक्रिया अब भी लिंग आधारित भेदभाव पर टिकी हुई है।
मामले पर गुरुवार को हुई प्रारम्भिक सुनवाई पे याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीड़ी सिंह हाजिर हुए। दलीलों पर गौर करने के बाद बेंच ने अनावेदकों को जवाब पेश करने के निर्देश दिए।
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