LAW'S VERDICT

सियासी टकराव फिर सुर्खियों में: उमा के खिलाफ दिग्विजय के मानहानि केस की हाईकोर्ट ने बुलाई स्टेटस रिपोर्ट

2003 के विधानसभा चुनाव में उमा भारती के आरोपों पर दिग्गी राजा ने लगाया था मानहानि का मामला  

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश की सियासत से जुड़े एक पुराने और चर्चित मानहानि प्रकरण में अहम कदम उठाते हुए दिग्विजय सिंह द्वारा उमा भारती के खिलाफ दायर मामले की स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने रजिस्ट्री कार्यालय को निर्देश दिए हैं कि निचली अदालत से प्रकरण की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट मंगाकर पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है।

वर्ष 2003 के चुनाव से जुड़ा है मामला 

यह मामला वर्ष 2003 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए कथित बयानों से जुड़ा हुआ है। उस समय उमा भारती ने मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह पर कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। इन बयानों को अपनी छवि के लिए नुकसानदायक बताते हुए दिग्विजय सिंह ने भोपाल के सीजेएम कोर्ट में मानहानि का मामला दायर किया था।

बचाव साक्षी से जिरह कराने का है विवाद 

मामले की सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह की ओर से सभी गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। इसके बाद उमा भारती की ओर से नरेन्द्र बिरथरे को साक्षी के रूप में पेश किया गया। हालांकि, बाद में दिग्विजय सिंह की ओर से यह मांग की गई कि नरेन्द्र बिरथरे को दोबारा बुलाकर उनका प्रति परीक्षण (cross-examination) किया जाए। इस मांग को सीजेएम कोर्ट ने 29 अगस्त 2017 को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका को एडीजे कोर्ट ने 25 सितंबर 2017 को खारिज कर दिया। इन दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए मामला वर्ष 2017 में हाईकोर्ट में दायर किया गया, जहां इसकी सुनवाई जारी है।

हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट 

सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह की ओर से अधिवक्ता राजीव मिश्रा उपस्थित हुए और मामले की सुनवाई की गई। सुनवाई के बाद अदालत ने यह महसूस किया कि मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। इसी के चलते कोर्ट ने निचली अदालत से स्टेटस रिपोर्ट तलब करने के निर्देश दिए हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

- यह मामला प्रदेश की दो दिग्गज राजनीतिक हस्तियों दिग्विजय सिंह और उमा भारती से जुड़ा है। 
- मामला करीब दो दशक पुराना (2003) है, लेकिन अब भी न्यायालय में लंबित है। 
- हाईकोर्ट द्वारा स्टेटस रिपोर्ट तलब करना यह संकेत देता है कि अदालत इस प्रकरण को गंभीरता से देख रही है।

अब निचली अदालत से आने वाली स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय होगी। 27 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


हाईकोर्ट का आदेश देखें     MCRC-19085-2017

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