हाईकोर्ट ने माना कलेक्टर ने अपने अधिकार से बाहर जाकर कार्रवाई की
इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शाजापुर के जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को हटाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए इस बारे में कलेक्टर रिजु बाफना द्वारा जारी किये गए आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने कहा है कि प्रथम दृष्टया कलेक्टर ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की है। अदालत ने न सिर्फ कलेक्टर के आदेश पर रोक लगाई, बल्कि रंगशाही को वापस जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार भी सौंपने के अंतरिम आदेश दिए। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार, शाजापुर कलेक्टर व अन्य को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने की एकतरफा कार्रवाई
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में चुनौती दी थी कि 20 जनवरी 2026 के आदेश के जरिए कलेक्टर, शाजापुर ने न केवल उनके खिलाफ चार्जशीट की सिफारिश की, बल्कि जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार भी उनसे छीनकर एक जूनियर अधिकारी (सहायक आबकारी अधिकारी) निमिषा परमार को सौंप दिया। याचिका में इसे मनमाना, गैरकानूनी और न्यायालय के पूर्व अंतरिम आदेश को निष्प्रभावी करने की कोशिश बताया गया।
पहले वेतन काटा फिर जांच भी शुरू की
मामले में यह भी तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ बिना सुनवाई के 5 दिन का वेतन काटा गया और उसी घटना पर दोबारा विभागीय जांच शुरू करना “डबल जियोपर्डी” (दोहरी सजा) के सिद्धांत के खिलाफ है। साथ ही, कलेक्टर और कमिश्नर को इस तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं होने की बात भी उठाई गई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राहुल देशमुख और सुदील यादव ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल ने जवाब पेश किया।
कलेक्टर ने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया: कोर्ट
कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में पाया कि कलेक्टर ने कमिश्नर द्वारा निलंबन जैसे कदम से पहले ही अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया। इसके चलते कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 (कलेक्टर, शाजापुर) और 16 फरवरी 2026 (कमिश्नर, उज्जैन संभाग) के आदेशों के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को अगली तारीख तक शाजापुर में जिला आबकारी अधिकारी के रूप में कार्य करने दिया जाएगा। मामले में नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-4951-2026
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