पीएस ने मानी गलती, हाईकोर्ट ने गलती सुधारने दी एक हफ्ते की मोहलत
ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर की 7 करोड़ से अधिक कीमत वाली जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दो टूक कहा कि कोई भी व्यक्ति या अधिकारी कोर्ट के किसी भी आदेश का इस्तेमाल गलतियों को छिपाने के लिए नहीं कर सकता। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने कहा कि एक तरफ तो सरकार अपनी सम्पत्तियों को बचाने खुद को काफी गंभीर बता रही, वहीं दूसरी और सरकार ऐसी जमीन को खुर्द - बुर्द करने के दोषी अधिकारी पर कार्रवाई भी नहीं कर रही। अदालत ने दोषी कर्मचारी को बचाने की कोशिश में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव एम सेलवेन्द्रन के रवैये की जमकर खिंचाई की। बेंच ने कहा कि सरकार के ऊंचे ओहदे पर बैठे अधिकारी को न ता संविधान का ज्ञान है और न ही उन्हें कानून की समझ है। यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रमुख सचिव सेलवेंद्रन ने संविधान की मर्यादा के खिलाफ काम किया है। हालाँकि श्री सेल्वेन्द्रन ने स्वीकार किया कि उनसे गलती हुई है, जिसे सुधारने का उन्हें एक मौका दिया जाए। बेंच ने उनकी याचना के मद्देनजर उन्हें मौका देकर एक सप्ताह में हलफनामे के साथ रिपोर्ट पेश करने कहा है। अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।
ग्वालियर की जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा है मामला
यह मामला ग्वालियर के दिनारपुर के सर्वे क्रमांक 349 की जमाने से जुड़ा है। इस मामले में निचली अदालत ने अमर सिंह के पक्ष में डिक्री पारित की थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में एक अपील वर्ष 2012 में दाखिल की गई। यह अपील तकनीकी आधार पर खारिज हुई, जिसको फिर से रेस्टोर करने यह मामला वर्ष 2013 में दायर हुआ था।
हाईकोर्ट ने पकड़ा फर्जीवाड़ा , एजी ऑफिस पर उठाये सवाल
इसी मामले की 27 अक्टूबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अहलूवालिया ने इस जमीन के फर्जीवाड़े को पकड़ा था। बेंच ने कहा था कि सरकार ने छोटी बाई नामक महिला के खिलाफ यह अपील वर्ष 2013 में दाखिल की है, जिसका निधन 10 सितम्बर 2011 को हुआ था। बेंच ने महाधिवक्ता कार्यालय ग्वालियर की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उसके लॉ अफसर सही ढंग से काम कर रहे या नहीं, इस पर सरकार विचार करे। अदालत ने मुख्य सचिव को कहा था कि वे इस मामले के दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करके रिपोर्ट पेश करें।
प्रमुख सचिव सेलवेन्द्रन से माँगा हलफनामा
मामले पर 9 मार्च 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया था कि इस मामले में दोषी पाए गए अजय देव शर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बावजूद इसके, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव ने आधी अधूरी जानकारी हाईकोर्ट में पेश की। अदालत ने कहा था कि या तो प्रमुख सचिव मामले को हलके में ले रहे या फिर वो कोर्ट में हलफनामा पेश करने से डर रहे हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव को शपथ पत्र पेश करने की मोहलत देकर सुनवाई 11 मार्च को करने के निर्देश दिए थे।
जब चार्जशीट थमाई फिर शो कॉज नोटिस क्यों?
मामले पर 12 मार्च को आगे हुई सुनवाई पर कोर्ट को बताया गया कि मामले में प्रारम्भिक रूप से दोषी पाए गए अशोक चौहान को चार्जशीट थमाई गई है। रिकॉर्ड को देखकर अदालत में पाया कि बिना विभागीय जांच किये अशोक चौहान पर सामान्य प्रशासन विभाग ने 4 फरवरी 2026 को एक आदेश जारी करके एक वेतन वृद्धि रोकने की माइनर पेनाल्टी लगा दी। कोर्ट ने कहा था कि यह समझ से परे है कि चार्जशीट जारी होने के बाद उसे शो कॉज नोटिस में बदलकर माइनर पेनाल्टी कैसे लगा दी गई? बेंच ने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को फिर से विचार करके रिपोर्ट पेश करने कहा था।
प्रमुख सचिव को किया तलब
मामले पर 17 मार्च को हुई सुनवाई पर अदालत ने प्रमुख सचिव एम सेलवेन्द्रन के जवाब को देखकर कहा कि यह वाकई चौंकाने वाली बात है कि एक तरफ तो राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी अपने अधिकारियों का बचाव कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जब वे अदालत में पेश होते हैं, तो वे समय बर्बाद करने की कोशिश करते हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने प्रमुख सचिव एम सेलवेन्द्रन को 18 मार्च को हाजिर होने कहा था।
हाईकोर्ट का आदेश देखें MCC-278-2013
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