LAW'S VERDICT

फोरेंसिक जांच के बिना नहीं कह सकते मोबाइल के फोटो असली हैं या नकली

नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज

जबलपुर। नाबालिग छात्रा को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी हर्ष उर्फ मोंटू सकतेल की अग्रिम जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायालय ने निरस्त कर दी है। आरोपी की ओर से दावा किया गया मोबाइल फोन से मिले मृतिका के फोटो नकली हैं। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रकिशोर बारपेटे की अदालत ने इस दावे को ठुकराते हुए कहा कि बिना फोरेंसिक जांच के नहीं माना जा सकता कि फोटो असली हैं या नकली। अदालत ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

अभियोजन के अनुसार, घमापुर थाना क्षेत्र निवासी 19 वर्षीय आरोपी हर्ष की मृतिका के साथ दोस्ती थी। घटना वाले दिन आरोपी ने मृतिका से विवाह करने और बातचीत जारी रखने से इनकार कर दिया था। इससे आहत होकर नाबालिग ने 17 दिसंबर 2025 को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला कायम किया गया है। मामले में गिरफ्तारी से बचने आरोपी ने यह अर्जी दायर की थी।

पेश किये फोटोग्राफ्स और कॉल डिटेल्स 

सुनवाई के दौरान आपत्तिकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक सोनी और डॉली सोनी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि मृतिका नाबालिग थी और आरोपी लंबे समय से मोबाइल के जरिया उसे परेशान कर रहा था। उन्होंने आरोपी और मृतिका के निजी फोटोग्राफ्स और कॉल डिटेल्स का हवाला देकर कहा कि आरोपी के व्यवहार के कारण नाबालिग मानसिक दबाव में थी, जिसके चलते उसने आत्मघाती कदम उठाया।

अग्रिम जमानत देना मुनासिब नहीं 

आरोपी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि प्रस्तुत फोटोग्राफ्स फर्जी हैं और आरोपी का घटना से कोई संबंध नहीं है।अदालत ने कहा कि मोबाइल की फॉरेंसिक रिपोर्ट आना शेष है और मृतिका नाबालिग थी। ऐसे में प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। इस मत के साथ अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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