हाईकोर्ट ने लोकायुक्त सचिव को 7 दिन में व्यक्तिगत हलफनामा देने कहा
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें लोकायुक्त की जांच प्रक्रिया पर ही सवाल उठ गए हैं। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों का सामना कर रहे सिंगरौली के एक एएसआई ने अदालत में दावा किया है कि उसके मकान की वास्तविक कीमत करीब 42 लाख रुपये है, जबकि लोकायुक्त जांच में उसका मूल्य सिर्फ 12 लाख रुपये आंका गया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने इस विसंगति को गंभीरता से लेते हुए लोकायुक्त सचिव को 7 दिन के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय में हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया गया, तो लोकायुक्त सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।
एएसआई और उसकी पत्नी ने दायर की याचिका
यह याचिका सिंगरौली के कोतवाली (बैढ़न) थाना में पदस्थ एएसआई अरविन्द कुमार द्विवेदी और उनकी पत्नी अनुराधा द्विवेदी की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि लोकायुक्त द्वारा 12 मई 2023 को दर्ज की गई एफआईआर गलत मूल्यांकन के आधार पर की गई है। आवेदकों का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई, जिससे उनके कैरियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जो कि अवैधानिक है।
लोकायुक्त के मूल्यांकन पर सवाल
सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं के मकान का मूल्य काफी कम आंका गया, लेकिन इस संबंध में लोकायुक्त की ओर से कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी तर्क रखा कि लोकायुक्त संगठन स्वयं भ्रष्टाचार से पूरी तरह मुक्त नहीं है, जिसके कारण जांच में ऐसी विसंगति सामने आई है। प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों और याचिकाकर्ता के दावों को देखते हुए डिवीजन बेंच ने लोकायुक्त सचिव को शपथपत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण देने का निर्देश जारी किया है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-34745-2025
