FIR रद्द होने पर भी नहीं रुकेगी ED जांच, PMLA केस जारी रखने को हरी झंडी
जबलपुर। मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में एक बेहद अहम और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी एक FIR के रद्द हो जाने से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई अपने आप समाप्त नहीं होती। यदि कोई अन्य वैध “Scheduled Offence” (निर्धारित अपराध) मौजूद है, तो PMLA (Prevention of Money Laundering Act, 2002) के तहत जांच जारी रह सकती है। जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट ने इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ दो याचिकाएं खारिज करके ED को आगे कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता दी है।
किशन मोदी व अन्य ने उठाये थे सवाल
यह मामला ECIR संख्या ECIR/BHZO/13/2024 से जुड़ा है, जिसे ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए दर्ज किया था। याचिकाकर्ताओं में. जयश्री गायत्री फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक किशन मोदी, अमित कुमार कुकलोद, पायल मोदी और राजेंद्र प्रसाद मोदी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए ECIR और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि EOW भोपाल द्वारा दर्ज FIR क्रमांक 27/2024 को पहले ही हाईकोर्ट द्वारा 13 फरवरी 2025 को रद्द किया जा चुका है। ऐसे में, उसी FIR के आधार पर शुरू हुई ED की कार्रवाई भी स्वतः समाप्त मानी जानी चाहिए।
मिलावटी दोष उत्पाद बनाने और एक्सपोर्ट करने के हैं आरोप
मामले में याचिकाकर्ता पर गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोप लगे हैं, जिनमें मिलावटी दूध उत्पादों का निर्माण और निर्यात करने, फर्जी लैब रिपोर्ट्स तैयार कराने, घटिया उत्पादों को असली बताकर बाजार में बेचने और धोखाधड़ी के जरिए अवैध कमाई करने के आरोप हैं। इस मामले में भोपाल के हबीबगंज थाने में वर्ष 2023 और EOW भोपाल द्वारा वर्ष 2024 में 2 FIR दर्ज की गई थीं, जो बाद में हाईकोर्ट द्वारा (EOW की FIR) रद्द की गई थी।
ED की कार्रवाई को बताया गैरकानूनी
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील देकर कहा गया कि PMLA की कार्यवाही पूरी तरह “Predicate Offence” (आधार अपराध) पर निर्भर करती है। FIR 27/2024 रद्द होने के बाद कोई वैध आधार नहीं बचा इसलिए ECIR और ED की जांच गैरकानूनी और अधिकार क्षेत्र से बाहर है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कई न्यायालयीन फैसलों का हवाला देकर कहा गया कि बिना आधार अपराध के PMLA केस नहीं चल सकता। वहीं ED की ओर से अधिवक्ता विक्रम सिंह ने कार्रवाई को जायज बताकर याचिकाएं निरस्त करने की प्रार्थना अदालत से की।
FIR रद्द होने से अपराध समाप्त नहीं हो जाता:हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने याचिकार्कताओं की सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि “केवल एक FIR के रद्द होने से यह नहीं माना जा सकता कि पूरा अपराध समाप्त हो गया है।” कोर्ट ने कहा कि FIR क्रमांक 0492/2023 अभी भी प्रभावी है। इसमें बने अपराध PMLA की अनुसूची में शामिल हैं, इसलिए यह ED की जांच के लिए पर्याप्त आधार है।
ED द्वारा दर्ज ECIR नहीं है FIR: कोर्ट
कोर्ट ने स्पष्ट किया ECIR कोई FIR नहीं है। यह ED का आंतरिक दस्तावेज है। इसकी वैधता FIR के समान मानकों पर नहीं जांची जा सकती। कोर्ट ने कहा कि ED विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर जांच कर सकती है। केवल एक FIR पर निर्भर रहना जरूरी नहीं। इन टिप्पणियों के साथ जस्टिस शर्मा की बेंच ने दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
यह निर्णय मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है क्योंकि PMLA जांच केवल एक FIR पर निर्भर नहीं, बल्कि कई स्रोतों से मिले साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई संभव है। हाईकोर्ट के इस फैसले से ED के अधिकारों को मजबूती मिलेगी।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-9694-2025
