जबलपुर। शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र गोलबाजार में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को 10 सदस्यीय संयुक्त टीम गठित कर पूरे क्षेत्र से अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराने और तीन माह के भीतर विस्तृत पालन रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है।
यह निर्देश जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस आरसीएस बिसेन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को तय समयसीमा में कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की गई है।
जनहित याचिका में क्या कहा गया
यह जनहित याचिका गोलबाजार निवासी जयदीप शाह द्वारा दायर की गई थी। याचिका में कहा गया कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत गोलबाजार क्षेत्र के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद लगातार हो रहे अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण के कारण सड़कें और मार्ग बाधित हो रहे हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि संबंधित विभाग अतिक्रमण हटाने और मूलभूत नागरिक सुविधाएं बनाए रखने में विफल रहे हैं, जिससे व्यापारियों और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
10 सदस्यीय संयुक्त टीम बनाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने कलेक्टर को 10 सदस्यीय संयुक्त टीम बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के अधिकारी शामिल होंगे। टीम में शामिल होंगे:
वरिष्ठ अतिरिक्त कलेक्टर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ नगर निगम के अतिक्रमण अधिकारी और संबंधित जनप्रतिनिधि
इसके अलावा गोलबाजार क्षेत्र के तीन स्थानीय निवासियों को भी टीम में शामिल किया जाएगा, जिनमें
याचिकाकर्ता,एक वरिष्ठ चिकित्सक और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल होंगे।
पहले निरीक्षण, फिर हटेगा अतिक्रमण
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संयुक्त टीम 30 दिनों के भीतर गोलबाजार क्षेत्र का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके बाद कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त अगले 30 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि अतिक्रमण चिन्हांकन से लेकर हटाने तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाए, ताकि कार्रवाई की पारदर्शिता बनी रहे।
