लॉ स्टूडेंट की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार व एग्रीगेटर कंपनियों से जवाब
इंदौर। मध्यप्रदेश में एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के जरिए चल रही बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी किया है। एक लॉ स्टूडेंट की याचिका में आरोप लगाया गया है कि बाइक टैक्सी संचालित करने वाली कंपनियां Rapido, Ola और Uber बिना जरूरी परमिट और व्यावसायिक नंबर प्लेट के बिना दो-पहिया वाहनों का संचालन टैक्सी के रूप में करा रही हैं। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने राज्य सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों के साथ कुल 10 को 4 सप्ताह में जवाब देने कहा है।
यह जनहित याचिका इंदौर के एबी रोड में रहने वाले लॉ स्टूडेंट आयुष जाट की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य में बड़ी संख्या में दो-पहिया वाहन टैक्सी के रूप में चल रहे हैं, लेकिन इन पर टैक्सी के लिए अनिवार्य पीली नंबर प्लेट नहीं लगी है और न ही इनके पास वैध परिवहन परमिट है।
न जीपीएस, न सेफ्टी अलार्म
याचिका में यह भी कहा गया है कि एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा संचालित इन सेवाओं में सुरक्षा मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। कई वाहनों में GPS सिस्टम, सेफ्टी अलार्म और अन्य आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही Motor Vehicle Guidelines 2025 के तहत एग्रीगेटर कंपनियों को वाहन मालिकों को 40 घंटे का अनिवार्य प्रशिक्षण देना होता है, लेकिन इसके अनुपालन की निगरानी के लिए राज्य ने किसी प्राधिकरण को स्पष्ट रूप से नियुक्त नहीं किया है।
नहीं दी गई स्पष्ट जानकारी
मामले में याचिकाकर्ता ने सूचना के अधिकार के तहत ट्रैफिक विभाग से जानकारी मांगी थी। 25 जुलाई 2025 को दिए गए जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बाइक टैक्सी वाहनों के परमिट की जांच की गई है या नहीं और इस संबंध में कोई चालान या कार्रवाई भी दर्ज नहीं बताई गई। वहीं क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से मांगी गई जानकारी का जवाब भी नहीं मिला।
नहीं हो रहा नियमों का पालन
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित सिंह सिसोदिया ने कहा कि इसी मुद्दे पर पहले भी एक याचिका पर आदेश पारित किया जा चुका है, लेकिन उसके बावजूद नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-6895-2026
