LAW'S VERDICT

सेंट्रल GST के असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा को मिली हाईकोर्ट से बेल

4 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में CBI ने किया था गिरफ्तार 

जबलपुर। 4 लाख रूपए की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किये गए सेंट्रल जीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा को मप्र हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की अदालत ने मामले पर गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा फैसला शुक्रवार को सुनाते हुए यह फैसला दिया।  

होटल कारोबारी ने की थी शिकायत 

सीबीआई जबलपुर के समक्ष होटल कारोबारी और सतपुड़ा इंफ्राकॉन प्रा.लि. के डायरेक्टर विवेक त्रिपाठी ने शिकायत देकर सीजीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर विवेक वर्मा व अन्य पर होटल सुकून सिटी व्यू के जीएसटी टैक्स मामले को लेकर 4  लाख रूपए की रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे।  सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए 17 दिसंबर 2025 को ट्रैप के दौरान सह-आरोपी को पकड़ लिया, जबकि विवेक वर्मा को 18 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था

आरोपी की ओर से दी गई दलील

आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त और अधिवक्ता कुणाल दुबे ने कोर्ट में कहा कि शिकायत और एफआईआर में आवेदक का नाम नहीं था। तीनों वेरिफिकेशन रिपोर्ट में भी उसका नाम का उल्लेख नहीं किया गया। ट्रैप के दौरान सह-आरोपी और आवेदक के बीच हुई मोबाइल बातचीत में रिश्वत मांगने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है और शैडो गवाहों ने भी विवेक वर्मा के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। इसके अलावा श्री दत्त ने यह भी बताया कि आरोपी 85 प्रतिशत दिव्यांग है और उसका बायां पैर कट चुका है। उसके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा। इन आधारों पर विवेक वर्मा को जमानत देने की मांग की गई।

CBI की ओर से किया गया विरोध

हालांकि, सीबीआई की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता और अन्य व्यक्तियों के बीच हुई बातचीत से रिश्वत मांगने के आरोप का समर्थन होता है। इसके अलावा प्री-ट्रैप मेमो के अनुसार 4 लाख रुपये बरामद किए गए हैं, इसलिए आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने दी जमानत

हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद कहा कि मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना आवेदक को जमानत दी जा सकती है। अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही राशि के एक जमानती पर रिहा किया जाए। 


हाईकोर्ट का आदेश देखें  MCRC-60477-2025

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