स्टोन क़्वेरी लीज रद्द करने के खिलाफ दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने छतरपुर जिले में स्टोन क़्वेरी लीज रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने कहा है कि पट्टा मिलने के बाद भी यदि लंबे समय तक खनन कार्य शुरू नहीं किया जाता और संबंधित नियमों के तहत राहत के लिए आवेदन भी नहीं किया जाता, तो प्रशासन द्वारा लीज निरस्त करने को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
याचिकाकर्ता M/s Golden Stones नामक साझेदारी फर्म ने याचिका दायर कर 24 फरवरी 2018 को कलेक्टर छतरपुर द्वारा लीज निरस्त करने के आदेश, साथ ही 31 जुलाई 2018 और 24 जनवरी 2020 को अपील खारिज करने के आदेशों को चुनौती दी थी।
वर्ष 2011 में मिली थी लीज
याचिकाकर्ता फर्म को 9 मार्च 2011 को 4 हेक्टेयर भूमि पर पत्थर (गिट्टी बनाने हेतु) खनन के लिए क़्वेरी लीज दी गई थी। यह भूमि खसरा नंबर 1348, ग्राम प्रकाश बम्हौरी, तहसील गौरिहार, जिला छतरपुर में स्थित है। इसके लिए 23 मार्च 2011 को 10 वर्ष की अवधि का लीज एग्रीमेंट भी किया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि लीज एग्रीमेंट होने के बावजूद उसे भूमि का वास्तविक कब्जा कभी नहीं दिया गया, जिसके कारण वह खनन कार्य शुरू नहीं कर सका।
नोटिस और लीज निरस्तीकरण
कलेक्टर छतरपुर ने 12 मार्च 2014 को नोटिस जारी कर आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता ने डेड रेंट और रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया। सतह किराया जमा नहीं किया। आवश्यक रिटर्न जमा नहीं किए और सीमा चिन्ह स्थापित नहीं किए। इन आरोपों को म.प्र. माइनर मिनरल नियम, 1996 का उल्लंघन बताया गया। इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने 22 अप्रैल 2014 को जवाब देकर कहा कि कब्जा नहीं मिलने के कारण खनन कार्य शुरू ही नहीं हुआ, इसलिए ये आरोप लागू नहीं होते। करीब चार साल बाद 24 फरवरी 2018 को कलेक्टर ने लीज रद्द कर दी।
अपील भी हुई खारिज
राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने डिवीज़न बेंच का बताया कि लीज निरस्त होने के बाद पहली अपील निदेशक, भूविज्ञान एवं खनन संचालनालय के समक्ष की गई, जिसे 31 जुलाई 2018 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद दूसरी अपील मध्यप्रदेश शासन के समक्ष दायर की गई, जिसे 24 जनवरी 2020 को खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ ही हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
2018 तक शुरू नहीं किया खनन
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को 9 मार्च 2011 को 10 वर्ष की लीज दी गई थी, लेकिन 2018 तक भी खनन कार्य शुरू नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी कारण से खनन कार्य शुरू नहीं हो पाता, तो म.प्र. माइनर मिनरल नियम, 1996 के नियम 27(7) के तहत संबंधित प्राधिकरण से समय बढ़ाने के लिए आवेदन किया जा सकता था। लेकिन याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई आवेदन नहीं किया। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि लीज की मूल अवधि भी अब समाप्त हो चुकी है, इसलिए इस मामले में कोई राहत देना संभव नहीं है। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि प्रशासन द्वारा लीज निरस्त करने में कोई अवैधता नहीं है। अंततः अदालत ने याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-15821-2020
