जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि पॉक्सो से जुड़े हर मामले में पीड़िता की 10वीं की मार्कशीट और स्कूल का एंट्री रजिस्टर जब्त किया जाए, ताकि पीड़िता की उम्र का सही निर्धारण किया जा सके। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने कहा कि अदालत लगातार देख रही है कि पॉक्सो मामलों में विवेचना अधिकारी अक्सर पीड़िता की 10वीं की मार्कशीट जब्त नहीं करते, जबकि यह दस्तावेज उम्र निर्धारण के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। यदि ये दस्तावेज जब्त किए जाएं तो पीड़िता की उम्र तय करने में आसानी होगी। अदालत ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि विवेचना अधिकारियों द्वारा यह चूक जानबूझकर की जाती है या किसी अन्य कारण से, लेकिन इसका असर समाज के ताने-बाने पर पड़ रहा है। अदालत ने डीजीपी को निर्देश दिया कि 30 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए और इसे लंबित मामलों में भी लागू किया जाए।
अपील की सुनवाई के दौरान दिया गया आदेश
यह निर्देश सीधी जिले के कुसमी थाना क्षेत्र के एक युवक की ओर से दायर अपील की सुनवाई के दौरान दिए गए। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सीधी की विशेष अदालत ने 28 अक्टूबर 2025 को आरोपी को 20 वर्ष की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ जमानत के लिए दायर अपील पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से अधिवक्ता पुष्पेन्द्र कुमार वर्मा और राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता श्वेता यादव उपस्थित रहीं।
डीजीपी को सर्कुलर जारी करने के निर्देश
अदालत ने डीजीपी को निर्देश दिया कि सभी पुलिस अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट सर्कुलर जारी किया जाए, जिसमें कहा जाए कि यदि पीड़िता 11वीं या 12वीं में पढ़ रही है, या 10वीं में फेल हुई है, तो उसका मैट्रिक प्रमाण पत्र रिकॉर्ड में अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। जिस स्कूल में पीड़िता ने पहली बार प्रवेश लिया था, उस स्कूल का प्रथम प्रवेश (Entry) रजिस्टर भी जब्त किया जाए, क्योंकि यह उम्र निर्धारण का सबसे विश्वसनीय दस्तावेज माना जाता है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CRA-10882-2025
