7वें वेतनमान का लाभ 60 दिनों में देने और नियमितीकरण पर विचार के आदेश
जबलपुर। दमोह जिला अस्पताल में पिछले करीब 10 वर्षों से सेवाएं दे रहे 8 वार्ड बॉय को बड़ी राहत देते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सातवें वेतनमान का लाभ देने और नियमितीकरण पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 7वें वेतनमान के मेट्रिक्स लेवल का लाभ 60 दिनों के भीतर दिया जाए और 1 अगस्त 2023 से देय एरियर्स का भुगतान किया जाए। साथ ही, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को 22 जुलाई 2023 की नियमितीकरण नीति के तहत 6 माह के भीतर उनके नियमितीकरण के मुद्दे पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं।
दमोह जिला अस्पताल के हैं याचिकाकर्ता
यह याचिका दमोह जिला अस्पताल में कार्यरत मनीष सोनी, अखिलेश रैकवार, जावेद कुरैशी, राजेश करोसिया, राजेश राज, तरुण तिवारी, कृष्णकांत प्रजापति और दालचंद अहिरवार की ओर से दायर की गई थी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे वर्ष 2013 से संविदा आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। अन्य समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ दिया जा चुका है, जबकि उन्हें इससे वंचित रखा गया।
याचिकाकर्ता समान वेतन के हकदार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रवि महेन्द्र कुमार व्यास ने पक्ष रखा। सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को वेतनमान का समान लाभ मिलना चाहिए। 7वें वेतनमान के मेट्रिक्स लेवल का लाभ 60 दिनों में प्रदान किया जाए। 1 अगस्त 2023 से बकाया एरियर्स का भुगतान किया जाए। नियमितीकरण नीति 22 जुलाई 2023 के तहत 6 माह में निर्णय लिया जाए। अदालत के इस आदेश से दमोह जिला अस्पताल के इन 8 संविदा वार्ड बॉय को महत्वपूर्ण राहत मिली है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-25908-2025
