मजदूर की विधवा और बेटी को मिली शीर्ष अदालत से बड़ी राहत
क्या है पूरा मामला?
कटनी निवासी शंभू उर्फ शिब्बू, जो एक प्राइवेट कंपनी में जेसीबी मशीन ऑपरेटर (कुशल श्रमिक) था, की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। कटनी के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (ट्रायल कोर्ट) ने मृतक के परिवार को 52 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया। इफको टोक्यो बीमा कंपनी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने घटाया मुआवजा
Madhya Pradesh High Court ने बीमा कंपनी की अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मृतक की आय का पर्याप्त प्रमाण नहीं है। ऐसे में शंभू उर्फ़ शिब्बू के परिवार को दिया गया मुआवजा "अत्यधिक" है। हाईकोर्ट ने मुआवजा 52 से घटाकर सिर्फ 9.5 लाख रुपए कर दिया। साथ ही पीड़ित परिवार को दी गई अतिरिक्त राशि वसूलने के आदेश भी बीमा कंपनी को दी। इस आदेश के खिलाफ मृतक की पत्नी और बेटी की और से सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कुशल श्रमिक था मृतक
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मृतक शंभू उर्फ़ शिब्बू कुशल श्रमिक (JCB ऑपरेटर) था। उसकी आय और क्षमता को नजरअंदाज करना गलत है। हाईकोर्ट ने मुआवजा तय करते समय अत्यधिक कटौती की। ऐसे में हाईकोर्ट का आदेश अनुचित था। इस मत के साथ शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट का आदेश खारिज कर दिया।
पीड़ित परिवार को मिली बड़ी राहत
पीड़ित परिवार की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ आर. गुप्ता और योगेश सोनी ने मजबूत पक्ष रखते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवार के पक्ष में मुआवजा बढ़ाकर 60 लाख रुपए करके बीमा कंपनी को भुगतान का आदेश दिया। इस फैसले से मृतक की विधवा और बेटी को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
