जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सोमवार को बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब एक युवक अपने मृत बच्चे के भ्रूण को लेकर सीधे कोर्ट रूम में जज की आसंदी तक पहुंच गया। यह घटना दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है, जब मामले की सुनवाई के दौरान अचानक यह घटनाक्रम सामने आया और कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए।
जानकारी के अनुसार, युवक दयाशंकर पांडे (निवासी रीवा) अपने मृत भ्रूण को लेकर जस्टिस हिमांशु जोशी की कोर्ट में पहुंच गया और अपने केस की पुकार होते ही आसंदी तक पहुंच गया।घटना के तुरंत बाद हाईकोर्ट के सुरक्षा कर्मियों ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया और बाद में सिविल लाइंस पुलिस को सौंप दिया। इस घटना ने हाईकोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्नी के एक्सीडेंट में हुई थी बच्चे की मौत
बताया जा रहा है कि दयाशंकर पांडे की गर्भवती पत्नी का कुछ दिन पहले सड़क हादसा हो गया था। इस दुर्घटना में गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई थी। इसी मृत भ्रूण को लेकर दयाशंकर पांडे सोमवार को हाईकोर्ट पहुंचा था और सुनवाई के दौरान उसे कोर्ट रूम में लेकर जज की आसंदी तक पहुंच गया।
हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की मांग को लेकर लगाई याचिका
रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नंदा निवासी दयाशंकर पांडे ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उसने इच्छामृत्यु (फांसी) की अनुमति देने की मांग की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह पहले लोकसभा चुनाव भी लड़ चुका है। चुनाव के बाद उस पर कथित हमले हुए और उसे लगातार कानूनी निराशा का सामना करना पड़ा। उसके अनुसार, 14 अप्रैल 2024 , 9 मई 2025 और 6 नवंबर 2025 को हुए हमलों की शिकायत संबंधित अधिकारियों को दी गई थी और ये घटनाएं रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन घटनाओं और लगातार चल रहे विवादों से परेशान होकर उसने हाईकोर्ट की असाधारण अधिकारिता का सहारा लेते हुए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी है।
राष्ट्रपति और CJI को भी बनाया था पक्षकार
दयाशंकर पांडे ने अपनी याचिका में भारत के राष्ट्रपति और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को भी पक्षकार बनाया था। हालांकि, मामले की सुनवाई करते हुए 23 फरवरी को जस्टिस हिमांशु जोशी ने आदेश देते हुए राष्ट्रपति और सीजेआई के नाम को अनावेदकों की सूची से हटाने के निर्देश दिए थे।

