LAW'S VERDICT

विधायक संजय पाठक का जज से संपर्क करने की कोशिश मामला डिवीजन बेंच में पहुंचा

चीफ जस्टिस की डिवीज़न बेंच ने 26 मार्च को सुनवाई करने कहा, विधायक पर कार्रवाई की चाही गई राहत 

जबलपुर। कटनी से भाजपा विधायक संजय पाठक द्वारा हाईकोर्ट के एक जज से संपर्क करने की कथित कोशिश का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच तक पहुंच गया है। इस प्रकरण में विधायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख 26 मार्च निर्धारित की है।

न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश 

याचिका कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की ओर से दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि विधायक संजय पाठक ने हाईकोर्ट के जज से संपर्क करने की कोशिश की थी, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि पाठक परिवार से जुड़ी खदानों के मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में निर्धारित थी। इसी दौरान 1 सितंबर 2025 को जस्टिस मिश्रा ने स्वयं इस बात का खुलासा किया था कि विधायक द्वारा उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी।

जस्टिस मिश्रा ने खुद को किया अलग

घटना के सामने आने के बाद जस्टिस विशाल मिश्रा ने निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर चीफ जस्टिस के समक्ष भेजने का निर्देश भी दिया था। यह कदम न्यायपालिका की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

कार्रवाई न होने पर लगाई है याचिका

याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इसी कारण उन्होंने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में याचिका दाखिल कर विधायक संजय पाठक के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

सुनवाई में ये रहे हाजिर 

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती उपस्थित रहे। वहीं राज्य सरकार की ओर से स्वप्निल गांगुली, उप महाधिवक्ता भी हाजिर हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला

यह मामला कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है:

न्यायिक स्वतंत्रता का सवाल: किसी जनप्रतिनिधि द्वारा जज से संपर्क करने की कोशिश न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर सकती है।

आचार संहिता का उल्लंघन: यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह जनप्रतिनिधियों के आचरण से जुड़े गंभीर मुद्दे को उजागर करता है।

प्रशासनिक जवाबदेही: शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना भी प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाता है।

 

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