LAW'S VERDICT

‘मुकदमा खारिज किया तो मालिक PF का पैसा रोकना शुरू कर देंगे’

कर्मचारियों का पीएफ रोकने वाले कंपनी मालिक को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट से 34 याचिकाएं खारिज

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के भविष्य निधि (PF) में गड़बड़ी करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बाद में पैसा जमा कर देने से अपराध खत्म नहीं हो जाता और ऐसे मामलों में मुकदमा जारी रहेगा। जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने भोपाल की सिक्योरिटी कंपनी के मालिक की 34 याचिकाएं एक साथ खारिज कर दीं।

क्या था मामला?

यह पूरा मामला भोपाल के एमपी नगर स्थित मे. एमपी सिक्योरिटी फोर्स कंपनी से जुड़ा है, जिसके मालिक एलएल सोनी हैं। उन पर आरोप है की कर्मचारियों के वेतन से 2008 से 2012 की अवधि में PF की राशि काटी गई लेकिन यह राशि सरकारी खाते में जमा नहीं कराई गई। इस पर रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर कार्यालय के एन्फोर्समेंट ऑफिसर द्वारा उनके खिलाफ भोपाल की कोर्ट में परिवाद दाखिल किया गया था। 

1.76 करोड़ जमा करने के बाद राहत की मांग

याचिकाकर्ता कंपनी मालिक ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उसने विवादित ₹1.76 करोड़ की राशि जमा कर दी है, इसलिए उसके खिलाफ चल रहे सभी मुकदमों को खारिज किये जाएँ। 

सरकार की ओर से कड़ा विरोध

एन्फोर्समेंट ऑफिसर की ओर से अधिवक्ता अभिषेक अरजरिया और राहुल चौरसिया ने दलील दी कि कई मामलों में गवाही शुरू हो चुकी है, कुछ मामलों में ट्रायल अंतिम चरण में है कुछ मामलों में तो सुनवाई पूरी भी हो चुकी है। ऐसे में केवल पैसा जमा करने के आधार पर मुकदमा खत्म करना गलत होगा।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने अपने फैसले में कहा- “यदि बाद में पैसा जमा करने पर मुकदमे खत्म किए जाएं, तो मालिक  जानबूझकर कर्मचारियों का पैसा रोकना शुरू कर देंगे।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया समय पर PF जमा न करना स्वयं में अपराध है। बाद में भुगतान करने से अपराध समाप्त नहीं होता। याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध बनता है

34 याचिकाएं खारिज, ट्रायल जारी रहेगा

हाईकोर्ट ने कंपनी मालिक को कोई राहत देने से इनकार करके सभी 34 याचिकाएं खारिज कर दीं। हालांकि अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए

मालिकों के लिए चेतावनी है यह फैसला 

यह फैसला खासतौर पर उन नियोक्ताओं के लिए चेतावनी है जो कर्मचारियों के वेतन से कटौती तो करते हैं, लेकिन समय पर सरकारी खातों में जमा नहीं करते। कोर्ट का यह भी स्पष्ट संदेश है कि “कर्मचारियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।”

हाईकोर्ट का आदेश देखें      MCRC-21720-2023

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